मौसम ने लिया चौंकाने वाला यू-टर्न, मार्च में घना कोहरा देख लोग हैरान….
दिल्ली‑NCR ने आज सुबह अनोखा मौसम देखा, जब पूरे क्षेत्र पर घना कोहरा छा गया और विजिबिलिटी कई जगहों पर 600 मीटर तक गिर गई।यह नजारा इसलिए और हैरान करने वाला था क्योंकि पिछले कई दिनों से न्यूनतम व अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर चल रहा है तथा मार्च की शुरुआत को पिछले 50 वर्षों में सबसे गर्म माना जा रहा है।
मार्च में भी कोहरे से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार सुबह मौसम ने अचानक ऐसी करवट ली कि लोग हैरान रह गए। जहां एक ओर गर्मी लगातार बढ़ रही थी, वहीं सुबह घने कोहरे और ठंडी हवाओं ने दिसंबर जैसी सर्दी का अहसास करा दिया। कई जिलों में दृश्यता लगभग शून्य तक पहुंच गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग ने बताई कारणों की पूरी वैज्ञानिक कहानी
IMD के अनुसार, आज का घना कोहरा कई मौसमीय कारणों के एकसाथ सक्रिय होने से बना।पश्चिमी हिमालय पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (WD) सक्रिय है, जिसने निचले स्तर पर स्थिर हवा की परत बना दी।इस स्थिरता के साथ बंगाल की खाड़ी से आने वाली पूर्वी हवाएं नमी लेकर दिल्ली‑NCR तक पहुंचीं।निचले स्तर पर ठंडी, नम हवा फंस गई, जबकि दिन में तेज धूप के कारण तापमान लगातार बढ़ा हुआ है।इस मिश्रण ने रात में सतह पर तापमान गिरते ही रेडिएशन फॉग बनने की आदर्श स्थिति बना दी।
सुबह जब लोग नींद से जागे तो चारों ओर कोहरे की चादर फैली हुई थी। जैसे-जैसे सुबह आगे बढ़ी, कोहरा और घना होता गया। कुछ समय के लिए दृश्यता मात्र 10 से 12 मीटर रह गई, जिसके कारण वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी गति से चलना पड़ा। हालांकि करीब नौ बजे के बाद कोहरा धीरे-धीरे छंटने लगा और साढ़े नौ बजे तक धूप निकल आने से जनजीवन सामान्य हो गया।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे मौसमीय सेटअप में मार्च के शुरुआती दिनों में उत्तर‑पश्चिम भारत में घना कोहरा पहले भी दर्ज किया जा चुका है।उदाहरण के तौर पर मार्च 6-8, 2008 को इसी तरह के कोहरे से उत्तर भारत में कई पावर ट्रांसमिशन लाइनों में फॉल्ट हुए थे। 2010 और 2013 में भी कोहरे के कारण ग्रिड ट्रिपिंग और लाइन फॉल्ट जैसी घटनाएं घट चुकी हैं। इसलिए IMD का मानना है कि आज जैसा कोहरा असामान्य नहीं, बल्कि एक विशेष मौसमीय संयोजन का परिणाम है।
