92 साल की उम्र में आशा भोसले का निधन,अलविदा सुरों की मलिका…
सुरों की मल्लिका आशा भोसले का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें शनिवार रात चेस्ट इन्फेक्शन के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। आशा भोसले बीते 70 सालों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा थीं। उन्होंने कई भाषाओं में रिकॉर्ड 12 हजार गाने गाए।
पहले खबर आई कि आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट के चलते भर्ती कराया गया है, लेकिन बाद में उनकी पोती जनाई भोसले ने खुलासा किया कि उनकी दादी को चेस्ट इन्फेक्शन था। 12 अप्रैल को आशा भोसले का निधन हो गया। ANI के मुताबिक, ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉक्टर्स का कहना है कि आशा ताई का मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के चलते निधन हुआ है।
भारतीय संगीत जगत की दिग्गज आवाज Asha Bhosle के निधन की खबर ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। दशकों तक अपनी मधुर आवाज से लोगों के दिलों पर राज करने वाली इस महान गायिका के जाने के बाद सोशल मीडिया पर शोक की लहर दौड़ गई है।फैंस से लेकर फिल्मी सितारों और नेताओं तक—हर कोई उन्हें अपने-अपने अंदाज में याद कर रहा है।इंटरनेट पर जैसे एक साथ लाखों यादें उमड़ पड़ी हों, जहां हर पोस्ट में उनकी आवाज, उनके गाने और उनकी मुस्कान जिंदा नजर आ रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग Asha Bhosle को “एक युग का अंत” बता रहे हैं।कई यूजर्स ने लिखा कि उनकी आवाज सिर्फ गाने नहीं थी, बल्कि भावनाओं का हिस्सा थी।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्सपर उनके पुराने गाने, इंटरव्यू और स्टेज परफॉर्मेंस के वीडियो तेजी से शेयर किए जा रहे हैं।लोग उनके सुपरहिट गानों को पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
पीएम मोदी ने जताया दुख :
आशा भोसले के निधन से पीएम नरेंद्र मोदी को भी झटका लगा है। उन्होंने श्रद्धांजलि देते हुए एक्स पर लिखा, “भारत की सबसे जानी-मानी और बहुमुखी आवाज़ों में से एक, श्रीमती आशा भोसले जी के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। दशकों तक फैली उनकी अनोखी संगीत यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है और दुनिया भर में अनगिनत लोगों के दिलों को छुआ है।उन्होंने आगे कहा, “दिल को छू लेने वाली धुनों से लेकर जोशीली रचनाओं तक, उनकी आवाज़ में एक कालातीत चमक थी। उनके साथ हुई बातचीत की यादों को मैं हमेशा संजोकर रखूंगा। उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी, और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे।”
आशा भोसले का पहला बड़ा सम्मान और वर्ल्ड रिकॉर्ड
- पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड: उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का पुरस्कार 1968 में फिल्म ‘दस लाख’ के गाने ‘गरीबों की सुनो’ के लिए मिला था।
- कुल फिल्मफेयर अवॉर्ड: उन्होंने कुल 7 बार यह अवॉर्ड जीता। इसके बाद उन्होंने खुद को नॉमिनेशन से अलग कर लिया ताकि नई प्रतिभाओं को मौका मिल सके। 2001 में उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से नवाजा गया।
- नेशनल अवार्ड्स: उन्हें फिल्म ‘उमराव जान’ (1981) और ‘इजाजत’ (1987) के लिए दो बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।
- पद्म विभूषण: साल 2000 में भारत सरकार ने उन्हें सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान ‘दादा साहब फाल्के अवॉर्ड’ और 2008 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया।
- गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: साल 2011 में गिनीज बुक ने आधिकारिक तौर पर उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग (सर्वाधिक गाने) करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी। आशा 20 भाषाओं में 12 हजार से ज्यादा गाने गा चुकीं थीं।
