इस्राइल का हिजबुल्ला के साथ युद्धविराम वार्ता से इनकार, ईरान ने शांति समझौते पर रखी ये शर्तें….
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही अहम कूटनीतिक हलचल के बीच ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने अपनी प्रमुख मांगें रख दी हैं. अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच इन शर्तों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन पर आगे की बातचीत निर्भर करेगी.
ईरानी डेलिगेशन ने साफ तौर पर चार बड़ी मांगें रखी हैं-
पहली, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को तुरंत रिलीज किया जाए .दूसरी, लेबनान में तत्काल युद्धविराम लागू किया जाए. तीसरी, हॉर्मुज की खाड़ी से रोजाना सिर्फ 15 जहाजों के गुजरने की सीमा तय हो और इसके साथ पारगमन शुल्क भी लागू किया जाए. चौथी, खाड़ी देशों से अमेरिकी सैनिकों की वापसी सुनिश्चित की जाए.
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरिफ़ ने साफ कहा है कि अगर बातचीत “अमेरिका फर्स्ट” सोच के साथ होती है तो समझौता संभव है. लेकिन अगर “इजरायल फर्स्ट” नीति अपनाई गई तो कोई डील नहीं होगी. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में ईरान अपनी रक्षा और मजबूत करेगा, जिसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के मुताबिक, वार्ता के लिए 15 दिन की समयसीमा तय की गई है. अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, जो तय करेंगे कि युद्धविराम स्थायी शांति में बदलेगा या फिर तनाव दोबारा बढ़ेगा. ईरानी प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान की हवाई सीमा में प्रवेश के दौरान AWACS, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमान और लड़ाकू विमानों की सुरक्षा दी गई. इस्लामाबाद और रावलपिंडी में भी भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है.
