भारत कर रहा पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी,तीन कंपनियों को मिला मेगा प्रपोजल…
भारत ने खुद के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट यानी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए तीन चुनिंदा प्राइवेट कंपनियों के समूहों को टेंडर (RFP) जारी किया है।जिनमें लार्सन एंड टुब्रो-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत फोर्ज-बीईएमएल शामिल हैं।एएमसीए कार्यक्रम को भारत की सबसे महत्वाकांक्षी लड़ाकू विमान परियोजना माना जा रहा है, जिसके 2030 के मध्य से भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता की रीढ़ बनने की उम्मीद है।
भारत अब सिर्फ लड़ाकू विमान खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि खुद अगली पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट बनाने की तैयारी में जुट गया है। रक्षा मंत्रालय ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर देश के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी है। यह देश का पहला पूर्ण स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर होगा।15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत चुनी गई प्राइवेट कंपनी आंध्र प्रदेश में एक नई ग्रीनफील्ड सुविधा केंद्र स्थापित करेगी। इस केंद्र में AMCA के पांच प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे।इस प्रोजेक्ट में सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की कंपनियों को बराबरी का मौका दिया जा रहा है। इस भारतीय वायुसेना के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण मिशन माना जा रहा है। साल 2035 के बाद यह विमान भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत बनेगा। इस दो इंजन वाले विमान की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह एक स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, यानी इसे दुश्मनों के रडार आसानी से नहीं पकड़ पाएंगे। इसमें हथियार विमान के अंदर ही छिपे होंगे। यह फाइटर जेट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस सेंसर जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस होगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 15 मई को श्री सत्य साईं जिले में 16 हजार करोड़ रुपये की एएमीए इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना की आधारशिला रखी। इसे भारत के रक्षा इतिहास का ‘ऐतिहासिक अध्याय’ बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह पहल आंध्र प्रदेश के लिए एक नए युग की शुरुआत करेगी।इस साल मार्च में ससंद की रक्षा समिति ने कहा था कि आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलाव हो रहा है और उन्नत लड़ाकू विमानों की जरूरत बढ़ रही है। चीन भी अपने छठी पीढ़ी के विमान पर काम कर रहा है और उसने इसके कुछ वीडियो भी जारी किए हैं। इसके अलावा, चीन अपने पांचवीं पीढ़ी के विमान पाकिस्तान के साथ साझा करने की तैयारी में है, जिससे भारत के लिए यह चुनौती और बढ़ जाती है।
सरकार पूरे प्रोजेक्ट को फंड कर रही है। निजी पार्टनर को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के अंतर्गत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के साथ मिलकर काम करना होगा। पूरा प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में 650 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही नई सुविधा में किया जाएगा।L1 चयन और अनुबंध जनवरी-मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। पहला प्रोटोटाइप 2028 से 2032 के बीच उड़ान भर सकता है, जबकि बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद विमान 2035 के बाद भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है।यह प्रोजेक्ट भारतीय रक्षा उद्योग में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने वाला मील का पत्थर साबित होगा। इससे परियोजना में तेजी आएगी और अत्याधुनिक एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। AMCA न सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा बल्कि देश को फाइटर जेट निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा।
