जो देश में कभी नहीं हुआ वो बंगाल में हुआ,दूसरे चरण में बंपर वोटिंग…
पश्चिम बंगाल में सेकेंड फेज की 142 सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई है।पश्चिम बंगाल में जहां पहले चरण में 93.19 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी, वहीं आज दूसरे चरण में भी करीब 92 फीसदी वोटिंग हुई है। इसी के साथ बंगाल में वोटिंग का कुल औसत 92.63 फीसदी से ज्यादा हो गया है, जो कि देश में किसी राज्य में वोटिंग का नया रिकॉर्ड है।
अब बंगाल के दोनों चरणों में कुल 92.52 फीसदी मतदान दर्ज कर लिया गया है। आंकड़ों को उठाकर देखा जाए तो बंगाल में कभी भी 84.72 फीसदी से ज्यादा वोटिंग नहीं हुई। यानी इस बार पश्चिम बंगाल में मतदान का एक नया रिकॉर्ड स्थापित हुआ है। इतना ही नहीं, बंगाल में हुई वोटिंग देशभर में किसी भी राज्य में हुई वोटिंग के रिकॉर्ड से ज्यादा हो गई है। अब तक यह रिकॉर्ड त्रिपुरा के पास था, जहां 2013 में 91.82 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी।
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “आज़ादी के बाद से पश्चिम बंगाल में पहले और दूसरे चरण में अब तक का सबसे ज़्यादा पोलिंग परसेंटेज-चुनाव का पर्व, पश्चिम बंगाल का गर्व”
बंगाल में वोट प्रतिशत बढ़ने की 4 वजहें…
1-राज्य में पिछले 15 साल से TMC की सरकार है। ऐसे में नेताओं के खिलाफ नाराजगी, रोजगार, भ्रष्टाचार और घुसपैठियों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे मतदाताओं को ज्यादा संख्या में बाहर लाए।
2-वहीं, मुस्लिम बहुल और सीमावर्ती इलाकों में SIR और NRC के डर ने भी मतदान को प्रभावित किया। दूसरी तरफ, तेज ध्रुवीकरण के चलते हिंदू वोटरों की भागीदारी भी बढ़ी मानी जा रही है।
3-इस बार बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर सिर्फ वोट डालने के लिए दूसरे राज्यों से बंगाल लौटे। उन्हें लगा कि अगर इस बार मतदान नहीं किया, तो उनका अधिकार छिन सकता है। TMC ने आरोप लगाया कि भाजपा ट्रेनों में भर-भरकर लोगों को वोटिंग के लिए ला रही है, जिससे यह मुद्दा और चर्चा में रहा।
4-चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी और 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती ने माहौल बदला। सुरक्षा बढ़ने से मतदाताओं में भरोसा आया और उन्होंने बिना डर के मतदान किया, जिसका असर सीधे वोटिंग प्रतिशत पर दिखा।
