अमेरिका मिडटर्म चुनाव रिजल्ट:ट्रम्प दोनों सदनों में मिडटर्म इलेक्शन हारे, डेमोक्रेट्स को बहुमत…
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को हार मिली है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है।वहीं, मिशिगन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद ने जीत हासिल की। इसके साथ ही वह अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं।अब्दुल अल-सईद ने जनता का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि वे लोगों की सेवा उसी प्यार, खुले विचारों, मेहनत और ईमानदारी के साथ करना चाहते हैं, जो उन्हें जनता से मिली है। अब्दुल ने कहा कि उनके जीवन के सबसे मुश्किल समय में लोगों ने उनका साथ दिया। जनता ने उन्हें हिम्मत, भरोसा और आगे बढ़ने की उम्मीद दी। अब वे इस प्यार और विश्वास को वाशिंगटन तक लेकर जाना चाहते हैं और वहां लोगों की आवाज बनकर काम करना चाहते हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने जबरदस्त वापसी करते हुए अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है।पारंपरिक रिपब्लिकन गढ़ों में सेंध, गर्वनरों की रेस में बड़े उलटफेर और ट्रंप समर्थित उम्मीदवारों की हार ने राष्ट्रपति चुनाव से पहले व्हाइट हाउस और कैपिटल हिल के बीच सीधे टकराव की जमीन तैयार कर दी है।डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस दोनों में बहुमत हासिल कर 2024 के रिपब्लिकन वर्चस्व को पलट दिया है।जनवरी 2027 में नई कांग्रेस शुरू होने पर डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफरीज़ के पहले अश्वेत ‘हाउस स्पीकर’ बनने की संभावना है।
सीनेट: सीनेट की 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 33 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं।इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। बाकी 2 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। इन नतीजों को मिलाकर डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 54 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स: हाउस में कुल 435 सीटें हैं और सभी सीटों पर चुनाव हुए हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 228 सीटें जबकि ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 139 सीटें जीती हैं।
गवर्नर: कुल 36 सीटों में से 34 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं। 22 डेमोक्रेट्स और 12 रिपब्लिकन ने सीटें जीती हैं। 2 राज्यों में वोटों की गिनती जारी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि ईरान के साथ युद्ध का असर मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा, मुझे लगता है कि इसका एक कारण ईरान था। हालांकि, लोगों ने ईरान को लेकर मेरे किए गए कामों के महत्व को भी समझा। उन्होंने कहा कि संभव है कि मतदाता पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के तत्काल प्रभावों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। ट्रंप ने यह भी कहा कि कैबिनेट में बदलाव करने की उनकी संभावना नहीं है।
हालांकि,ट्रंप ने साफ कर दिया है कि डेमोक्रेट्स जो भी बिल भेजेंगे, उन्हें वो वीटो कर देंगे। यह सिर्फ एक धमकी नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से तैयार की गई योजना का हिस्सा है, जिसे ट्रंप की टीम पिछले कई महीनों से बना रही है।अमेरिकी संविधान के तहत, राष्ट्रपति के पास कांग्रेस से पारित किसी भी विधेयक को अस्वीकार करने का अधिकार होता है, जिसे वीटो कहा जाता है। ट्रंप ने कहा है कि वो इस शक्ति का जमकर इस्तेमाल करेंगे। ट्रंप ने कहा, ‘वो (डेमोक्रेट्स) ऐसी चीजें भेजेंगे जो बेतुकी हैं और मैं उन्हें वीटो कर दूंगा।’ ट्रंप का मानना है कि ‘एक-दो महीने’ लगातार वीटो करने के बाद डेमोक्रेट्स खुद बातचीत के लिए आएंगे। वीटो को पलटने के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की जरूरत होती है। वर्तमान में डेमोक्रेट्स के पास इतना बहुमत नहीं है, इसलिए ट्रंप के वीटो को पलटना लगभग नामुमकिन है। यानी ट्रंप डेमोक्रेटिक कांग्रेस से पारित किसी भी कानून को रोक सकते हैं, जिससे डेमोक्रेट्स का पूरा विधायी एजेंडा ठप हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों से नाराज कुछ देशों के नेताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत का स्वागत किया है।
स्पेन: प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कहा कि अमेरिकी लोगों ने नफरत फैलाने, जलवायु परिवर्तन को न मानने और अमीर-ताकतवर लोगों के दबदबे के खिलाफ वोट दिया है।
नॉर्वे: नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर ने कहा कि अमेरिका में अब ऐसे लोग अपनी बात रख रहे हैं, जिनकी सोच नॉर्वे से मिलती है। हाल ही में ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने को लेकर नॉर्वे को गाली दी थी।
दक्षिण अफ्रीका: राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि इन चुनावों से दुनिया के देशों के रिश्तों में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है। ट्रम्प पहले दक्षिण अफ्रीका पर वहां के गोरे लोगों के खिलाफ नरसंहार करने का आरोप लगा चुके हैं।
यूरोपीय संसद: यूरोपीय संसद की उपाध्यक्ष क्रिस्टेल शाल्डेमोस ने कहा कि चुनाव के नतीजों से उन्हें थोड़ी उम्मीद जगी है। उन्हें लगता है कि अब अमेरिका यूक्रेन की और मदद कर सकता है।
