केंद्रीय कैबिनेट के बड़े फैसले,रेलवे कर्मचारियों को दिवाली दिवाली बोनस,दिव्यांगों को जन्म से पेंशन…
केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को तीन बड़े फैसलों का एलान किया। इन फैसलों में रेलवे कर्मचारियों को सरकार ने त्याेहारों से पहले बड़ी सौगात दी है। कैबिनेट ने लगभग 11,40,770 रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रदर्शन-आधारित बोनस को मंजूरी दी है। यह बोनस 78 दिनों के वेतन के बराबर होगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे मेहनती रेलवे कर्मचारियों के लिए दिवाली का तोहफा बताया।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस पर करीब ₹2,009 करोड़ खर्च होंगे।दिव्यांगों की पेंशन नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब दिव्यांगों को 18 साल की बजाय जन्म से पेंशन मिलेगी। कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला भी लिया है।
कैबिनेट के फैसले:-
1. रेलवे कर्मचारियों को बोनस :-रेल मंत्री ने कहा कि बोनस का मकसद कर्मचारियों को उनकी मेहनत के लिए प्रोत्साहित करना और रेलवे के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना है।यह बोनस दिन-रात अथक परिश्रम करने वाले मेहनती रेलवे कर्मचारियों के लिए दिवाली का तोहफा है। जब हम अपने परिवारों के साथ त्योहार मना रहे होते हैं, तब ये कर्मचारी चौबीसों घंटे खेतों में, रेलवे ट्रैक पर, इंजनों के अंदर और कार्यशालाओं में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए काम करते रहते हैं।रेलवे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में 1,670 मिलियन टन माल की ढुलाई की गई, जो उस साल का रिकॉर्ड था। इस दौरान रेलवे से करीब 7.41 अरब यात्रियों ने सफर किया।रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाले प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) की गणना के लिए अधिकतम मासिक वेतन सीमा ₹7,000 तय की गई है। इस आधार पर 78 दिन के बोनस की अधिकतम रकम ₹17,951 बनती है।यह अधिकतम गणना की रकम है। कर्मचारियों को मिलने वाला वास्तविक बोनस उनकी पात्रता और लागू नियमों के आधार पर अलग हो सकता है।
2. दिव्यांगता पेंशन :- केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, ‘दूसरा फैसला विकलांगता पेंशन के नियमों को आसान बनाया गया है। पहले कम से कम 80 फीसदी विकलांगता होने पर ही यह पेंशन मिलती थी, लेकिन अब इस सीमा को आधा घटाकर 40 फीसदी कर दिया गया है, यानी अब 40 फीसदी विकलांगता वाले व्यक्ति भी पेंशन के हकदार होंगे।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब विकलांग व्यक्तियों को जन्म से ही पेंशन योजना के तहत कवर किया जाएगा। इसका मतलब है कि दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा दो तरह से बढ़ेगा: पहला, पेंशन पाने की पात्रता की सीमा (विकलांगता फीसदी) को कम करके और दूसरा, इसके लाभार्थियों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी करके।दिव्यांगों की पात्रता में यह बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार किया गया है।इस कानून के तहत 40% या उससे ज्यादा दिव्यांगता वाले व्यक्ति को बेंचमार्क दिव्यांगता की श्रेणी में रखा जाता है। नियमों के मुताबिक, दिव्यांगों को मिलने वाली सहायता राशि समान श्रेणी की दूसरी योजनाओं के मुकाबले कम से कम 25% ज्यादा रखने का प्रावधान भी है।
3. सामाजिक सहायता कार्यक्रम :- तीसरे फैसले के तहत देश के सामाजिक सुरक्षा दायरे (सोशल सिक्योरिटी नेट) को 2031 तक बढ़ाने और उसका विस्तार करने का है, जिसके लिए 53,428 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।इससे देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को मदद मिलेगी।इसके तहत बुजुर्गों और विधवाओं को पेंशन, दिव्यांगों को आर्थिक सहायता और परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मौत होने पर पात्र परिवार को मदद दी जाती है। NSAP की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए हुई थी।यह संविधान के अनुच्छेद 41 में दिए गए नीति-निर्देशक सिद्धांतों से जुड़ा है और इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है। सरकार के मुताबिक, बुजुर्गों और विधवाओं की पेंशन योजनाएं और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना पहले की तरह जारी रहेंगी। वहीं, अन्नपूर्णा योजना के तहत ऐसे पात्र बुजुर्गों को अनाज दिया जाता है, जिन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ नहीं मिलता।
इसके अलावा, सरकार ने तीन पेंशन योजनाओं से इंदिरा गांधी का नाम हटाकर उनमें प्रधानमंत्री शब्द जोड़ने का फैसला किया है।कुल पांच योजनाओं के नाम बदले गए हैं।

