टीएमसी में बड़ी टूट,58 विधायकों ने अलग गुट बनाया, ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष , विधानसभा स्पीकर ने दी मंजूरी…
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। ममता बनर्जी की टीएमसी में टूट गई है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में 28 साल के इतिहास में पहली बार औपचारिक तौर पर टूट सामने आई है। बुधवार को 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों ने स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस से मुलाकात कर उनसे कहा था कि वे TMC के असली गुट हैं और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी जाए। ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि उनके साथ 60 विधायक हैं और वहीं असली टीएमसी है। उन्हें विधानसभा में नेता विपक्ष का रूम भी अलॉट कर दिया गया है। जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता जबकि अखरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका गुट ममता बनर्जी को पत्र लिखकर इस गुट के दल का मुख्य सलाहकार बनने का अनुरोध करेगा। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी पार्टी को मार्गदर्शन देती रहें।ऋतब्रत ने यह भी कहा कि मैंने पार्टी में बात करने की कोशिश की तो पहले तीन दिन तो मुझे घुसने ही नहीं दिया गया। भ्रष्टाचार इस चुनाव का अहम मुद्दा रहा। बार-बार बोलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सबूत थे। फिर बोला गया कि चुनाव के बाद कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। अभिषेक बनर्जी चोरों की तरह पिटने के बाद बोले कि आवाम उनकी सुरक्षा करेगी। फिर उनकी तरफ से सुरक्षा के लिए चिट्ठी लिखी गई।
संदीपन साहा ने कहा कि हमारी इच्छा है कि ममता बनर्जी हमारी सलाहकार बनी रहें और हमें अपनी सलाह देती रहें, ताकि हम, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक के साथ मिलकर, विधानसभा के अंदर पार्टी को प्रभावी ढंग से चला सकें।उन्होंने कहा कि पार्टी की जो बुरी हालत आज हो गई है, कुछ हद तक, वह अभिषेक बनर्जी की नाकामी है। आखिर, अगर जब सब कुछ अच्छा होता है तो आप उसका श्रेय लेते हैं, तो जब चीजें गलत होती हैं तो आपको उसकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी विधानसभा स्पीकर और ममता बनर्जी का कोई बयान नहीं आया है। ममता के पास अब 22 विधायकों का समर्थन है। TMC ने 294 सीटों में से 80 सीटें जीती थीं।यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब नेता विपक्ष चुनने के प्रस्ताव पर फर्जी साइन का आरोप लगाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। इसी बीच सीनियर लीडर कुणाल घोष ने बताया कि TMC विधायक फिरहाद हकीम ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है।बागी गुट ने अपने पत्र में ममता बनर्जी को अब भी पार्टी अध्यक्ष बताया है। लेकिन अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व और विधायक दल से जुड़े फैसलों को मानने से इनकार किया है।
