धनतेरस :दो दिन का शुभ मुहूर्त,क्या खरीदें और क्या न खरीदें…
दो दिन का शुभ मुहूर्त –
दीपोत्सव का उल्लास शुरू हो गया है। समृद्धि और आरोग्य का पर्व धनतेरस का पर्व इस वर्ष दो दिन 6 और 7 को मनाया जाएगा।छोटी दीपावली यानी नरक चतुर्दशी शनिवार को मनाई जाएगी। इस बार धनतेरस पर खरीदारी के लिए दो दिन का शुभ संयोग बन रहा है।कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी शुक्रवार को सुबह 11 बजकर सात मिनट के बाद शुरू होकर शनिवार को सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। ऐसे में शुक्रवार को 11:07 बजे के बाद से शनिवार को सुबह 10:43 बजे तक खरीदारी की जा सकती है। धनतेरस को भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर लोग स्वस्थ और निरोगी जीवन की कामना करते हैं।इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन और नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
क्या खरीदें –
लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस दिन क्या खरीदना शुभ माना जाता है और किन वस्तुओं को घर लाने की परंपरा रही है?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा पीतल के बर्तन खरीदने की भी पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन घर में नई धातु की वस्तुएं लाने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य में वृद्धि होती है।पद्म पुराण और स्कंद पुराण में लक्ष्मी को अन्न और धान्य को बढ़ाने वाली देवी कहा गया है। धनिया के बीज भी अंकुरित होकर बढ़ते हैं, इसलिए इसे आमदनी और संपत्ति में बढ़ोतरी का प्रतीक माना जाता है। इस मान्यता के चलते धनतेरस पर धनिया के साबुत बीज खरीदे जाते हैं।धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। हालांकि, किसी धर्म ग्रंथ में इसका जिक्र नहीं है, लेकिन परंपरा में झाड़ू को घर की दरिद्रता, नकारात्मकता और दुखों को बाहर निकालने का प्रतीक माना गया है।
क्या न खरीदें –
नुकीली और धारदार चीजें: चाकू, कैंची, ब्लेड या सुई जैसी नुकीली चीजें धनतेरस के दिन न खरीदें। मान्यताओं के अनुसार, धारदार चीजें घर में कलह और रिश्तों में कड़वाहट का कारण बन सकती हैं।लोहे का सामान: धार्मिक मान्यताओं में लोहे का संबंध शनि देव से माना जाता है।धनतेरस पर लोहा खरीदना शुभ नहीं माना जाता।इसकी जगह आप सोना, चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन खरीद सकते हैं।लेकिन ध्यान रखें कि बर्तन को घर में एकदम खाली न लाएं। घर लाने से पहले उसमें थोड़े चावल, गेहूं, मिठाई, धनिया के बीज या थोड़ा जल जरूर डाल लें।ऐसा करने से घर में बरकत बनी रहती है।काले रंग की वस्तुएं: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या त्योहार पर काले रंग से परहेज किया जाता है। इसे नकारात्मकता और दुर्भाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए धनतेरस पर काले कपड़े, जूते या सजावटी सामान खरीदने से बचें।कांच का सामान (क्रॉकरी): कांच की चीजें बेहद नाजुक होती हैं और जल्दी टूट जाती हैं। लोक मान्यताओं में कांच को राहु से जोड़कर देखा जाता है और इसका टूटना अशुभ माना जाता है।इसलिए इस दिन कांच के बर्तन या शोपीस लेने से बचें।तेल और घी की खरीदारी: दिवाली के दीये जलाने के लिए तेल और घी की जरूरत जरूर होती है, लेकिन कई परंपराओं में धनतेरस के दिन इन्हें बाजार से खरीदकर घर लाना वर्जित माना गया है।बेहतर होगा कि आप तेल और घी धनतेरस से एक-दो दिन पहले ही खरीद लें।चमड़े (लेदर) से बनी चीजें: चमड़े से बने पर्स, बेल्ट, जूते या बैग धनतेरस के दिन नहीं खरीदने चाहिए। पूजा-पाठ और पवित्र पर्वों में चमड़े को अशुद्ध माना जाता है, इसलिए शुभ अवसर पर इसे घर लाने से बचना चाहिए।
भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व
इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। जहां भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता माना जाता है, वहीं माता लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी तथा भगवान कुबेर को धन का अधिपति माना गया है। श्रद्धालु इस दिन पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
