ममता को सबसे बड़ा झटका – बागी लोकसभा सांसदों में शत्रुघ्न सिन्हा,यूसुफ पठान,सायोनी घोष शामिल…
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में लगातार टूट जारी है। न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, काकोली घोष के नेतृत्व वाले TMC बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों के नाम की लिस्ट जारी कर दी।इसमें ममता की करीबी मानी जाने वाली जादवपुर से सांसद सायोनी घोष, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा का भी नाम शामिल है। 8 जून को काकोली घोष ने दावा किया था कि उन्होंने 20 लोकसाभा सांसदों के समर्थन वाला पत्र स्पीकर ओम बिरला को भेजा है।पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी अभी सीधे दो हिस्सों में बंटने की कगार पर खड़ी है।
बागी सांसदो की जो लिस्ट सामने आई है, उसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से चुनकर आए ये सांसद कथित तौर पर शामिल हो चुके हैं। इसमें कई बड़े चेहरे भी शामिल है।बागी सांसदों की इस सूची में काकोली घोष (बारासात), जगदीश चंद्र बसूनिया (कूच बिहार) और खलीलुर रहमान (जांगीपुर) शामिल हैं।इसके साथ ही, टीएमसी के बागी कैंप में बहरामपुर के सांसद युसूफ पठान, अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलदर (माथुरापुर), सयानी घोष (कोलकाता साउथ), मिताली बेग (आरामबाग), दीपक अधिकारी (घाटल), कालिपदा सोरेन (झाड़ग्राम), जून मालिया (मेदिनीपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), डॉ. शर्मिला सरकार (बर्धमान ईस्ट), शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), आसित कुमार मल (बोलपुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम) और रचना बनर्गी (हुगली) शामिल हैं।
वहीं बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले 3 दिनों में TMC के दो राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था, पार्टी भी छोड़ दी थी।संकट के बीच वरिष्ठ नेता शताब्दी राय ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि केवल दो सांसद पार्टी छोड़ते तो इसे व्यक्तिगत मामला माना जा सकता था, लेकिन 20 से अधिक सांसदों का साथ छोड़ना नेतृत्व की गंभीर विफलता का प्रमाण है। शताब्दी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी को समय रहते नहीं समझा, जबकि अभिषेक बनर्जी और आइपैक को अत्यधिक अधिकार देने से जमीनी कार्यकर्ताओं का भरोसा कमजोर हुआ।
इधर, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने मंगलवार को पार्टी के बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला।उन्होंने बागी नेताओं पर राजनीतिक नैतिकता की कमी, भाजपा से संबंध रखने और संकट के समय पार्टी कार्यकर्ताओं को छोड़ने का आरोप लगाया।कल्याण बनर्जी ने सवाल उठाया कि यदि बागी सांसदों के पास उतना समर्थन है, जितना वे दावा कर रहे हैं, तो वे औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल क्यों नहीं हो रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा उन्हें स्वीकार नहीं करेगी।
