ममता बनर्जी की भतीजी ने की आत्महत्या,2 साल से डिप्रेशन में थीं…
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भतीजी ब्रिष्टी मुखर्जी मंगलवार को बीरभूम जिले के कुसुंबा गांव के घर में फंदे से लटकी मिलीं। ब्रिष्टि, ममता के चचेरे भाई और तृणमूल नेता निहार मुखर्जी की बेटी थीं।शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि उन्होंने सुसाइड किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिष्टि बोलपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थीं। शिक्षक भर्ती घोटाला सामने आने के बाद 2024 में उनकी जॉब चली गई थी। इसके बाद से ही वे डिप्रेशन में थीं।मंगलवार को उनका शव बीरभूम जिले के रामपुरहाट इलाके में स्थित उनके घर की दूसरी मंजिल के एक कमरे से बरामद किया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, बृष्टि मुखर्जी का शव रामपुरहाट इलाके के कुसुम्बा गांव स्थित उनके आवास से बरामद हुआ। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। फिलहाल पुलिस मौत से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत की परिस्थितियों को लेकर अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मौत की वजह और उससे जुड़ी परिस्थितियों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।पुलिस परिवार के सदस्यों से भी जानकारी जुटा रही है।पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उनकी मौत के पीछे तत्काल परिस्थितियां क्या थीं। बृष्टि के पिता निहार मुखर्जी, ममता बनर्जी के मामा के बेटे हैं और स्थानीय स्तर पर टीएमसी नेता हैं।
वहीं, परिवार की ओर से बताया गया है कि बृष्टि मुखर्जी पिछले कुछ वर्षों से अवसाद का इलाज करा रही थीं। परिजनों के मुताबिक, वह चिकित्सकीय उपचार ले रही थीं और नौकरी जाने के बाद से मानसिक रूप से काफी परेशान थीं।दरअसल, पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। भर्ती में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच मामला अदालत तक पहुंचा था। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई नियुक्तियां प्रभावित हुई थीं। परिवार के अनुसार, बृष्टि मुखर्जी भी नौकरी गंवाने वालों में शामिल थीं।शुरुआत में 26 हजार टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश कलकत्ता हाई कोर्ट ने दिया था और बाद में जब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, तो सुप्रीम कोर्ट ने भी इस हाई कोर्ट के इस आदेश को बरकरार रखा। बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद जिन लोगों की नौकरी रद्द की गई, उस लिस्ट में बृष्टि का नाम 608 नंबर पर था।
इस घटना ने एक बार फिर नौकरी छूटने और लंबे समय तक चलने वाले मानसिक दबाव जैसे मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की मौत को किसी एक वजह से जोड़ने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है। पुलिस भी फिलहाल मामले की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
