सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता गिरफ्तार, पत्नी और बेटा भी गिरफ्तार,अब तक 7 की मौत…
रविवार दोपहर दो बजे से सोमवार शाम 4:30 बजे तक लगभग 27 घंटे तक दिल्ली हॉस्टल हादसे में रेस्क्यू ऑपरेशन चला। अब ऑपरेशन पूरा हो चुका है।हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। 12 लोगों को बचाया गया है। इनमें 5 की हालत गंभीर है।वहीं, पुलिस ने हॉस्टल के मालिक हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तारी में ले लिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था।दिल्ली पुलिस ने हरिराम गुप्ता के बाद उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, उनकी 75 वर्षीय पत्नी उर्मिला गुप्ता और 52 वर्षीय बेटे महेश गुप्ता को इस मामले में हिरासत में लिया गया है। जांच में सामने आया कि संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम पर है, लेकिन उसका प्रबंधन और संचालन उनके पति हरिराम और बेटे महेश कर रहे थे।हरिराम गुप्ता भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त सार्जेंट हैं। उनके नाम पर इमारत की दो मंजिलों के बिजली कनेक्शन हैं। बेटा महेश गुप्ता हार्डवेयर और पेंट की दुकान चलाते हैं। उनके दो बच्चे हैं। पुलिस ने बताया कि संपत्ति के असली मालिक और लाभार्थी इन्हीं लोगों को माना जा रहा है।
वहीं दिल्ली हॉस्टल मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- हादसे के लिए दिल्ली नगर निगम और दिल्ली यूनिवर्सिटी दोनों जिम्मेदार हैं।कोर्ट ने कहा कि बाहर से पढ़ने आने वाले छात्रों के हॉस्टलों की हालत बेहद दयनीय और खराब है। सरकार जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है। अदालत ने एमसीडी (MCD), दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, एनएचआरसी (NHRC) और दिल्ली विश्वविद्यालय को 10 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।एक जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करते हुए अदालत ने सभी संबंधित अथॉरिटीज को 10 दिन के भीतर अपना अलग-अलग जवाब (हलफनामा) दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि असुरक्षित इमारतों से जुड़े हादसों के लिए सिर्फ भवन मालिक ही नहीं, बल्कि संबंधित सरकारी विभाग भी बराबर के जिम्मेदार हैं।कोर्ट ने वैध बिल्डिंग परमिशन की डिटेल और संबंधित अधिकारियों की तरफ से बरती गई किसी भी तरह की लापरवाही का पूरा ब्योरा तलब किया है। अदालत ने इस बात का संज्ञान लिया कि दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में हॉस्टल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों को मजबूरन पीजी में रहना पड़ता है। कोर्ट ने डीयू से बाहरी छात्रों की संख्या और उपलब्ध हॉस्टल सुविधाओं की विस्तृत जानकारी मांगी है।2022 से 2025 तक यानी 3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने के 1133 मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में 98 लोगों की मौत हुई है।
