टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पद से इस्तीफा दिया,फरवरी 2027 तक जिम्मेदारी संभालते रहेंगे,ट्रस्ट में खींचतान बनी वजह…
देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी- टाटा संस में इस वक्त उथल-पुथल मची है। अब इस कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एलान किया है कि वह अपना कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद पद छोड़ देंगे।उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।फिलहाल टाटा संस ने उनके इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। वह तुरंत पद नहीं छोड़ेंगे।वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे जो फरवरी 2027 तक है। एन. चंद्रशेखरन साल 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं।इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS के CEO रह चुके हैं। वह 1987 में टाटा ग्रुप से जुड़े थे।चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।
पद से इस्तीफा देने के बाद अपने एक बयान में एन चंद्रशेखरन ने कहा, ”मैंने टाटा ग्रुप में अपने प्रोफेशनल करियर के 40 साल पूरे कर लिए हैं।इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का मौका मिलना मेरे लिए बहुत संतोषजनक रहा है और मैं इसके लिए आभारी हूं। पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी की बात रही है।” उन्होंने आगे कहा, ”टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है।सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमिटी और बोर्ड ने भी मंजूरी दी थी। इसके बाद, 24 फरवरी, 2026 को टाटा संस के बोर्ड के सामने यह प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया और सर्वसम्मति न होने के कारण मैंने इस फैसले को टालने का निर्णय लिया।”टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”
18 अगस्त को होने वाली कंपनी की सालाना बैठक (AGM) में चंद्रशेखरन को बोर्ड में दोबारा डायरेक्टर चुने जाने पर वोटिंग होनी है।अगर वह डायरेक्टर नहीं रहते, तो चेयरमैन के पद पर बने रहना भी मुश्किल हो सकता है। बता दें कि रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच शेयरहोल्डिंग और वोटिंग अधिकारों को लेकर कानूनी पेंच फंसे हुए हैं। एक तरफ टाटा संस बोर्ड चंद्रशेखरन को अगले पद साल का विस्तार देना चाहते थे, लेकिन नोएल टाटा समूह ने 65 साल के रिटायरमेंट नियम का हवाला देते हुए केवल 2 साल के कार्यकारी कार्यकाल के पक्ष में रहने की बात की थी।चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल ₹22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा ₹4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।
