पांच बार के विधायक ने TMC ऑफिस में फांसी लगाई,सुसाइड नोट भी बरामद…
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व डिप्टी स्पीकर और पांच बार विधायक रहे आशीष बनर्जी की मौत से हड़कंप मच गया है। उनका शव रविवार (16 अगस्त 2026) की सुबह घर के पास स्थित पार्टी कार्यालय में लटका हुआ मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।आशीष बनर्जी रामपुरहाट के वार्ड नंबर-5 के हत्तलापारा इलाके में रहते थे। उनके घर के पास ही तृणमूल कांग्रेस का पार्टी ऑफिस था।वर्ष 2001 से 2026 तक रामपुरहाट का प्रतिनिधित्व करने वाले 75 वर्षीय बनर्जी हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार ध्रुव साहा से चुनाव हार गए थे।
पुलिस को शव के पास से एक पन्ने का सुसाइड नोट मिला है, जिसने राज्य के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। अपने अंतिम संदेश में पूर्व डिप्टी स्पीकर ने लिखा है कि मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। लेकिन आज मुझे अहसास हो रहा है कि राजनीति में आना ही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी।पेशे से शिक्षक रहे आशीष ने नोट में अपने साफ-सुथरे करियर का हवाला देते हुए लिखा कि उन्होंने जीवन भर एक पैसा भी गलत तरीके से नहीं लिया और हमेशा बिना फीस के छात्रों को पढ़ाया।उन्होंने लिखा कि मैं पार्टी के सभी गलत कामों को हमेशा स्वीकार नहीं कर पाता था, लेकिन मैं विरोध भी नहीं कर सका। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में काम के बदले एक पैसा भी नहीं लिया है।आशीष का जो सुसाइड नोट सामने आया है उसमें उन्होंने किसी रेत के टेंडर का जिक्र किया है। आशीष ने लिखा कि उन्होंने कभी भ्रष्टाचार नहीं किया और किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए। TRDA (तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी) के टेंडर, प्लान पास करने, NOC और चेक से जुड़े मामलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है।आशीष ने लिखा कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है और उन्होंने राजनीति में आने पर अफसोस जताया।
पुलिस ने घटनास्थल की जांच शुरू कर दी है. मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।आशीष बनर्जी के भाई प्रशांत बनर्जी ने कहा- दरवाजे में थोड़ी जगह थी और वहां से रस्सी लटकी दिखाई दी। इससे हमें शक हुआ। इसके बाद परिवार के सभी लोगों को बुलाया गया और पुलिस को सूचना दी गई।हम रोज मिलते थे। रात तक भी कुछ असामान्य नहीं लगा था। वे दिनभर ऑफिस में थे। झंडा फहराया गया था और सब कुछ सामान्य था।
