निठारी कांड-आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शव फंदे पर मिला,फांसी से बाल-बाल बचा कोली-आखिरकार फांसी से हुई मौत….
देश के बहुचर्चित निठारी कांड से करीब दो दशक तक जुड़े रहे अल्मोड़ा के सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।उसकी मौत के बाद एक बार फिर निठारी कांड और उसकी दहशत की याद आ गई। भले ही सुरेंद्र कोहली घटना के बाद से अपने पैतृक गांव में यदा-कदा आया हो। उसका मकान भी खंडहर हो चुका है। लेकिन उसकी मौत के बाद से अल्मोड़ा जिला फिर सुर्खियों में है।निठारी कांड में साल 2009 से 2017 के बीच सीबीआई की विशेष अदालतों ने सुरेंद्र कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में मौत की सजा (फांसी) सुनाई थी। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ठोस सबूतों के अभाव में पंढेर और कोली को बरी कर दिया।बाद में नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया, जिसके बाद कोली जेल से रिहा हो गया था। कुल मिलाकर पंढेर और कोली फांसी की सजा से बाल-बाल बचे। लेकिन कोली की मौत आखिरकार फांसी लगने से ही हुई।यह मामला कुछ ही देर में इंटरनेट मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। किसी ने इसे कुदरत का इंसाफ बताया। जबकि बहुत से लोग यह मान रहे हैं कि कोली की किस्मत में फांसी से मौत लिखी हुई थी।
दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव में पंढ़ेर की कोठी के पास नाले से कई बच्चों के कंकाल और अवशेष बरामद हुए थे। यह माना गया था कि व्यवसाय मनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली ने अपहरण कर बच्चों की हत्या की है।दोनों पर बच्चों के साथ अमानवीय कृत्य और उनका मांस भक्षण जैसे आरोप भी लगे थे। इस घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और आरोपितों को फांसी की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतरे थे।
सुरेंद्र कोली हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, जिससे उसका डिप्रेशन बढ़ गया। निठारी कांड के आरोपी ने मकान मालिक और रोजगार के लिए आधार कार्ड नहीं दिया, जिससे उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।लोगों के बीच वह सदाराम, निवासी अल्मोड़ा था, जबकि उसके सामान में रखा आधार कार्ड उसकी मुख्य पहचान थी। संभव है कि निठारी कांड में आरोपित रहने के बाद सुरेंद्र कोली को सामाजिक बहिष्कार और लोगों के व्यवहार बदलने का डर था। हालांकि, पुलिस को उसके सामान में मिली डायरी में उसने कुछ लोगों के लिए धन्यवाद भी लिखा था।
सुरेंद्र कोली के सामान की फोरेंसिक जांच के दौरान पुलिस को आधार कार्ड, फोटो पहचान पत्र, मोबाइल फोन, लेनदेन का हिसाब लिखी डायरी, कपड़े और अन्य सामान मिले हैं।आधार कार्ड में नाम सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर राम कोली और पता सेक्टर-31, नोएडा, गौतमबुद्धनगर, उत्तर प्रदेश दर्ज है। वहीं, वोटर आइडी में नाम सदाराम पुत्र शंकर राम और पता अल्मोड़ा दर्ज है।यह वोटर आइडी वर्ष 2003 की बताई जा रही है। हरिद्वार सहित अन्य स्थानों में उसने इसी पुराने परिचय को अपनी पहचान बना रखा था।पहचान छिपाने की यह कोशिश सुरेंद्र कोली के हरिद्वार में रहने और रोजगार तलाशने के दौरान भी दिखाई दी।
बहुचर्चित 2006 नोएडा के निठारी कांड के एक पीड़ित परिवार ने सुरेंद्र कोली की मौत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में अपनी 15 वर्षीय बेटी को खोने वाले पिता झब्बू लाल (64) ने दावा किया है कि सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है।झब्बू लाल का कहना है कि अगर कोली को जेल के अंदर आत्महत्या करनी होती तो समझा जा सकता था कि वह डिप्रेशन में था, लेकिन जेल से रिहा होने और कई महीने बाहर बिताने के बाद ऐसा कदम उठाना कई संदेह पैदा करता है।पीड़ित पिता ने आरोप लगाया कि सुरेंद्र शायद कोई बहुत महत्वपूर्ण जानकारी उजागर करने वाला था, इसीलिए उसकी हत्या कर दी गई है। झब्बू लाल ने एक बार फिर दावा किया कि कोली मुख्य अपराधी नहीं था, बल्कि उसके मालिक और व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंधेर (जिसके घर कोली काम करता था) मुख्य आरोपी था, जिसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
