चंद्रशेखरन 5 साल और टाटा संस के चेयरमैन रहेंगे,5 साल के एक्सटेंशन को टाटा संस बोर्ड की मंजूरी…
टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 2032 तक बढ़ा दिया गया है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को नया कार्यकाल देने को मंजूरी दी। कंपनी को शेयर मार्केट में उतारने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।गुरुवार को मुंबई में टाटा ग्रुप की एक बोर्ड मीटिंग हुई, जिसमें समूह के चेयरमैनशिप को लेकर एक अहम फैसला किया गया है। जिसके तहत अब टाटा समूह की कमान बतौर चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ही संभालेंगे। इस मीटिंग में उनके कायर्काल को पांच साल के लिए एक बार फिर से बढ़ा दिया गया है।अभी चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था। तब नोएल टाटा से मतभेद और ट्रस्ट में खींचतान की वजह बनी थी।टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस के बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन इस पर कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ।चंद्रशेखरन को दोबारा कार्यकाल देने का फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही RBI ने टाटा संस को लिस्टिंग से छूट देने की उसकी मांग खारिज कर दी थी। RBI के नियमों के मुताबिक टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्टिंग से जुड़ी आवश्यकताओं का पालन करना पड़ सकता है।
एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने के फैसले को अभी सालाना आम बैठक में मंजूरी मिलना बाकि है, जिसमें टाटा ट्रस्ट की 66% हिस्सेदारी है। ट्रस्ट के बोर्ड सदस्य नोएल टाटा फैसले के खिलाफ हैं, जबकि वेनु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया है।अपने इस फैसले को लेकर कंपनी ने हाल ही में एक बयान भी जारी किया है। अपने बयान में कंपनी ने बताया कि, ’17 सितंबर, 2026 को हुई बोर्ड की बैठक में, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (चंद्र) ने अपने फैसले पर फिर से विचार करने के बोर्ड के अनुरोध को मान लिया। इसके बाद, बोर्ड ने बहुमत से उन्हें उनके मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने के बाद अगले पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त करने का फैसला किया है।’टाटा ग्रुप में पहली बार कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव 65 साल की तय रिटायरमेंट उम्र के बाद भी पद पर बना रहेगा। टाटा ग्रुप की पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। हालांकि, नॉन-एग्जीक्यूटिव पद पर वे 70 साल तक रह सकते हैं।चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। उनका नया कार्यकाल 2032 में खत्म होगा, तब वे 70 साल के होंगे।
दरअसल चंद्रशेखरन ने पिछले महीने ही अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही थी।उन्होंने बताया था कि, वो बतौर चेयरमैन रिपॉइंटमेंट नहीं चाहते हैं।उन्होंने ये भी बताया था कि फरवरी में हुई बोर्ड मीटिंग के दौरान टाटा संस के एक बोर्ड सदस्य ने उनके 5 साल के कार्यकाल के विस्तार को लेकर समर्थन नहीं दिया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने बोर्ड की बैठक से पहले सर्वसम्मति से विस्तार की सिफारिश की। करीब छह महीने होने आए थे और इसका कोई समाधान नहीं निकला था, ऐसे में उन्होंने कहा था कि लीडरशिप को लेकर स्पष्टता की जरूरत है।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क :-
- टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
- टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
- टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
