अमित कश्यप हत्याकांड में आरोपी रविता और प्रेमी अमरदीप को सजा-ए-मौत,मेरठ में 3 दिन में 4 को मौत की सजा…
उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के गांव अकबरपुर सादात निवासी अमित कश्यप उर्फ मिक्की कश्यप हत्याकांड में अदालत ने उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस चर्चित ‘सर्पदंश हत्याकांड’ में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-12) जयवीर सिंह नागर की अदालत ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने के जुर्म में दोषी करार दिया है।
शुक्रवार को सजा सुनाने से पहले कोर्ट ने रविता और अमरदीप का पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुना। जज ने दोनों से पूछा- तुम दोनों को हत्या का दोषी ठहराया गया है। क्या सजा चाहते हो?रविता ने कहा-“मेरे 3 छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनका ख्याल रखा जाए। फिर वह चुप हो गई।”इसके बाद अमरदीप ने कहा-“मेरे मां-बाप बूढ़े हैं। उनकी सेवा करने वाला कोई नहीं है। उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे।
“इसके बाद दोनों फूट-फूट कर रोने लगे। ADJ-12 जयवीर सिंह नागर ने नीला ड्रम हत्याकांड का नाम लिए बगैर कहा- ‘केवल काट डालना ही जघन्य अपराध नहीं है।’
अदालत कक्ष में जब यह फैसला सुनाया जा रहा था, तब माहौल बेहद गंभीर था। सजा का एलान करने से पहले न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने प्राचीन ग्रंथों और भारतीय संस्कृति का हवाला दिया। उन्होंने ‘मनुस्मृति’ का जिक्र करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि ‘अधर्म कभी भी धर्म से नहीं जीत सकता’। इतना ही नहीं, न्यायाधीश ने पौराणिक प्रसंग का उदाहरण देते हुए महान भारतीय नारी ‘सावित्री’ का जिक्र किया, जो अपने पति के प्राण बचाने के लिए यमराज तक से भिड़ गई थीं और अपने सतित्व के बल पर उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था। इसके विपरीत, इस मामले में एक पत्नी ने अपने ही सुहाग की जीवन-लीला समाप्त करने के लिए खौफनाक साजिश रची। न्याय की इस अनूठी मिसाल और दलील ने कोर्ट रूम में मौजूद हर शख्स को सोचने पर मजबूर कर दिया।
अदालत में निर्णय के समय अमरदीप और रविता के परिवार से कोई भी नहीं पहुंचा। हालांकि रविता और अमरदीप के अधिवक्ता बलराज भाटी ने भी आखिरी बहस नहीं की।उन्होंने अपनी बहस को चैंबर से ही लिखकर अदालत में दाखिल करा दिया था। वादी पक्ष की अधिवक्ता फरजाना मकसूद ने दोनों मुजरिमों के लिए फांसी की मांग की थी।मेरठ कोर्ट ने पिछले 3 दिन में 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इससे पहले 14 अक्टूबर को नीले ड्रम वाली मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
अपराध का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि अमित के तीन मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। उनकी मां भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गई। अदालत ने कहा कि बच्चों के भविष्य पर पड़े इस गंभीर प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।अदालत ने अमित के तीनों बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी निर्देश जारी किए हैं। डीएम को बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई।कहा गया कि उन्हें अच्छे स्कूलों में प्रवेश दिलाने तथा राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अफसरों की है। साथ ही आदेशित किया कि बच्चों को क्या सुविधा मुहैया कराई गई है। अदालत को इसकी जानकारी से अवगत कराया जाए।
