UPI पेमेंट पर चार्ज का फॉर्मूला तय,₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा,किसी भी ट्रांजेक्शन पर ₹300 ज्यादा नहीं ले सकेंगे…
UPI ट्रांजैक्शन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकार 15 अक्टूबर से चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी कोई व्यक्ति अगर अपने UPI से किसी मर्चेट अकाउंट (बिजनेस अकाउंट) पर भुगतान करता है तो उसपर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने जा रही है। हालांकि अभी पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा।नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ₹2000 से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) तय किया है।ग्राहक किसी भी ट्रांजैक्शन का चार्ज नहीं देते हैं।MDR उन मर्चेंट पर लागू होता है जो पेमेंट स्वीकार करते हैं। पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा। हर ट्रांजैक्शन पर करीब 300 रुपए तक मैक्सिमम चार्ज देना होगा। यह अमाउंट अलग-अलग ट्रांजैक्शन पर निर्भर करेगा।हालांकि ₹2,000 तक पेमेंट करने पर ग्राहक से किसी तरह की फीस नहीं ली जाएगी। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी कर यह स्थिति साफ कर दी थी। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट को भी इस छूट में शामिल किया गया है।
सरकार ने यह महत्वपूर्ण अधिसूचना पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत जारी की है। इसका मुख्य कानूनी उद्देश्य छोटे डिजिटल लेन-देन को पूरी तरह से वित्तीय बोझ से मुक्त रखना और डिजिटल पेमेंट तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।इस सरकारी निर्देश में साफ किया गया है कि 2,000 रुपये तक के भुगतान पर कोई भी बैंक न तो सीधे तौर पर और न ही अप्रत्यक्ष रूप से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज वसूल सकता है। इसके अतिरिक्त, इस नोटिफिकेशन में रूपे डेबिट कार्ड से किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के डिजिटल भुगतान को भी नो-चार्ज श्रेणी में रखा गया है।मंत्रालय ने ये भी बताया कि 96% UPI मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन 2000 रुपये से कम के होते हैं और ये 100% चार्ज-फ़्री हैं। इसका साफ भाषा में ये मतलब है कि अधिकतर लोग सामान खरीदते समय 2000 रुपये से कम कीमत का सामन खरीदते हैं और उतना ही पेमेंट भी करते हैं। जिसे कि 2000 से कम के ट्रांजैक्शन 96% होते हैं। महज 4 प्रतिशत ट्रांजैक्शन पर ही UPI चार्ज लगेगा। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को ₹198 लाख करोड़ यूपीआई से पेमेंट हुए। इनमें ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन सिर्फ 4% हुए, लेकिन इनकी कुल वैल्यू ₹131 लाख करोड़ थी। जो कुल पेमेंट का 66% है।एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले P2P (Person-to-Person) पेमेंट मुफ्त रहेंगे। इसलिए दोस्त, परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति को बड़ी रकम UPI से भेजने पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
एमडीआर क्या है और यह उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले चार्ज से कैसे अलग?
इस पूरे विवाद को गहराई से समझने के लिए एमडीआर और यूजर चार्ज के बीच का बुनियादी फर्क समझना बेहद जरूरी है:-
- मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR): यह वह सेवा शुल्क होता है जो किसी दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान (मर्चेंट) द्वारा डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक, नेटवर्क और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को दिया जाता है। यह व्यापारी के व्यापारिक खर्च का हिस्सा होता है।
- यूजर चार्ज: यह वह फीस होती है जो पेमेंट करने वाले आम ग्राहक के बैंक खाते से सीधे काटी जाती है।
सरकार ने साफ किया है कि ग्राहकों पर कोई यूजर चार्ज नहीं लगाया जा रहा है, और यदि भविष्य में कोई व्यवस्था बनती भी है, तो वह मर्चेंट स्तर पर एमडीआर से जुड़ी हो सकती है, न कि आम उपभोक्ता से।
