चांद से टकराया स्पेसएक्स रॉकेट,4000 किलो वजनी रॉकेट 8,690 kmph की रफ्तार से अंतरिक्ष में घूम रहा था,NASA -धरती को खतरा नहीं….
स्पेस की दुनिया से एक बहुत बड़ी और हैरान करने वाली खबर आई है।एलोन मस्क की कंपनी ‘SpaceX’की एक बेकाबू रॉकेट भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 12:05 बजे चांद की सतह से टकरा गया है। 4 हजार किलो वजनी और करीब 5 मंजिला इमारत जितना बड़ा यह रॉकेट करीब 8,690 किमी/घंटा की रफ्तार से टकराया। नासा ने कहा कि इस टक्कर से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। हालांकि इस टक्कर की पुष्टि तस्वीरों के आने के बाद होगी।यह कोई प्लानिंग के तहत नहीं हुआ, बल्कि एक एक्सीडेंट था। बता दें कि यह पूरा रॉकेट नहीं था। यह फाल्कन 9 का ऊपरी हिस्सा था। यानी रॉकेट के दो हिस्सों में से दूसरा हिस्सा, जो दोबारा इस्तेमाल होने वाले पहले हिस्से (फर्स्ट स्टेज) के अलग होने के बाद चालू होता है।यह रॉकेट का कचरा पिछले 18 महीने से स्पेस में बिना किसी कंट्रोल के ऐसे ही फालतू घूम रहा था।आखिरकार चांद की ग्रैविटी ने इसे अपनी तरफ खींच लिया और यह बहुत तेज स्पीड में सीधे चांद पर जा गिरा।खगोलविदों ने डेटा का अध्ययन करके पहले ही अनुमान लगा लिया था कि यह रॉकेट भटककर सीधे चांद की ओर जा रहा है और उससे टकराएगा।
रॉकेट के टकराने की स्पीड इतनी तेज थी कि आप सोच भी नहीं सकते।यह लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की भयानक स्पीड से चांद से टकराया।जब यह टकराया, तो इससे निकला धमाका इतना बड़ा था जैसे 3,000 किलो बम एक साथ फट गया हो।जब इतना भारी लोहे का ढांचा इतनी खतरनाक स्पीड से टकराया, तो चांद की जमीन हिल गई। साइंटिस्ट्स का मानना है कि इस जोरदार धमाके की वजह से चांद पर करीब 20 से 30 मीटर यानी लगभग 8-10 मंजिला बिल्डिंग जितना बड़ा और गहरा गड्ढा बन गया है।इसके साथ ही टकराने वाली जगह से चांद की बहुत सारी मिट्टी और धूल हवा में कई किलोमीटर ऊपर तक उड़ गई।फिलहाल जब यह हादसा हुआ, तब चांद का चक्कर लगा रहा कोई भी स्पेसक्राफ्ट सही पोजिशन में नहीं था, इसलिए लाइव तस्वीरें नहीं मिल पाई हैं।दक्षिण कोरिया का ‘दानुरी’ ऑर्बिटर और नासा का ‘लूनर रिकोनिसेंस ऑर्बिटर’ (LRO) आने वाले दिनों में टक्कर वाली जगह के ऊपर से गुजरेंगे और तस्वीरें लेंगे। वैज्ञानिक पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके चांद की सतह पर बने नए निशान की पहचान करेंगे।
चांद पर कोई वायुमंडल या पर्यावरण नहीं है, इसलिए इस कचरे से वहां किसी ईकोसिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, वैज्ञानिक चिंतित हैं कि भविष्य में बढ़ते लूनर ट्रैफिक के कारण ऐतिहासिक अपोलो लैंडिंग साइट्स को नुकसान न पहुंचे और नए स्पेसक्राफ्ट्स के टकराने का जोखिम न बढ़े।
साइंस म्यूजियम की स्पेस हेड लिब्बी जैक्सन के अनुसार, यह वैज्ञानिकों के लिए काफी रोमांचक प्रयोग है क्योंकि रॉकेट की स्पीड, वजन और आकार का डेटा पहले से मौजूद था।आमतौर पर जब कोई प्राकृतिक उल्कापिंड चांद से टकराता है, तो वैज्ञानिकों के पास उसका शुरुआती डेटा नहीं होता।साइंटिस्ट्स के लिए यह एक बड़ा मौका बन गया है।अब वे स्टडी कर रहे हैं कि जब कोई भारी चीज इतनी तेज स्पीड से चांद से टकराती है, तो वहां की जमीन पर क्या असर पड़ता है। इससे चांद के बारे में और नई जानकारी मिलेगी। इसके अलावा, इस एक्सीडेंट ने दुनिया की सभी स्पेस कंपनियों को एक चेतावनी भी दी है कि वे अपना कचरा स्पेस में ऐसे ही न छोड़ें, वरना आगे चलकर बड़े एक्सीडेंट हो सकते हैं।
