बंगाल CM सुवेंदु के PA हत्याकांड में 3 संदिग्ध गिरफ्तार,एक UPI पेमेंट ने जाल में फंसाया…
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में बिहार और यूपी से 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें दो युवक- मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य को बिहार के बक्सर, जबकि राज सिंह को उत्तर प्रदेश के अयोध्या से गिरफ्तार किया गया।पुलिस ने उत्तर प्रदेश और बिहार से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और संकेत दिया है कि इस हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में कम से कम आठ लोग शामिल थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी वारदात को अंजाम देने के बाद कोलकाता के पास बाली टोल प्लाजा से होते हुए फरार हुए थे। टोल पर ऑनलाइन पेमेंट के आधार पर पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाले और आरोपियों की पहचान की।चंद्रनाथ रथ की SUV को सिल्वर रंग की निसान माइक्रा कार से रोका गया था। इसके बाद बाइक सवार हमलावरों ने उन पर फायरिंग की। हत्या के बाद आरोपी माइक्रा कार घटनास्थल पर छोड़कर दूसरी लाल कार और बाइक से फरार हो गए।तीनों आरोपियों को आज पश्चिम बंगाल के बारासात कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस अब हत्या की साजिश, फंडिंग और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, यह सफलता तब मिली जब पुलिस ने हत्या से कुछ समय पहले निवेदिता सेतु पर स्थित बैली टोल प्लाजा पर किए गए एक यूपीआई ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया।संदिग्ध फरार कार में सवार लोगों में से एक ने कथित तौर पर कैश या FASTag का इस्तेमाल करने के बजाय डिजिटल तरीके से टोल का भुगतान किया, जिससे जांचकर्ताओं को आरोपी से जुड़े एक मोबाइल नंबर की पहचान करने में मदद मिली।अधिकारी ने कहा, “उस डिजिटल भुगतान से जांचकर्ताओं को संदिग्धों में से एक की पहचान स्थापित करने में मदद मिली। इस सुराग ने आखिरकार हमारी टीमों को उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुंचा दिया।”
अधिकारी ने कहा, “इस हत्या को बहुत ही बारीकी से योजना बनाकर अंजाम दिया गया था। हमलावरों ने अपनी पहचान और अपनी हरकतों को छिपाने के लिए कई कदम उठाए थे। घटनाओं के क्रम को फिर से समझने के लिए हम डिजिटल फुटप्रिंट्स, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सबूतों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।”पुलिस ने कोलकाता हवाई अड्डे और बारासात के पास अलग-अलग जगहों से हमले में इस्तेमाल की गई संदिग्ध भागने वाली कार और दो मोटरसाइकिलें बरामद कर ली हैं। कथित तौर पर तीनों वाहनों पर नकली नंबर प्लेट लगी थीं। बाकी आरोपियों का पता लगाने के लिए बंगाल और राज्य के बाहर कई जगहों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
