सोना न खरीदें, विदेश न जाएं ,पेट्रोल-डीजल बचाएं,PM मोदी की देश से ये बड़ी अपील…
दुनिया इस समय बड़े ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौर से गुजर रही है। कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर वैश्विक चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक बड़ी और अहम अपील की है। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी पेट्रोलियम चीजों का बहुत ही सोच-समझकर इस्तेमाल करने को कहा है। इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने लोगों से एक साल तक सोने के नए गहने नहीं खरीदने की भी अपील की है।उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते खड़े हुए वैश्विक संकट से निपटने के लिए विदेशी मुद्रा को बचाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, देशभक्ति सिर्फ जान देना नहीं बल्कि मुश्किल वक्त में जिम्मेदारी से जीना भी देशभक्ति है।प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश का इम्तिहान है। उन्होंने साफ कहा कि विदेशी मुद्रा बचाना और देश के संसाधनों की रक्षा करना भी आज के समय में देशभक्ति का एक बड़ा हिस्सा है।
पीएम ने कहा था-
- पीएम मोदी रविवार को कहा था, ‘आज के समय में पेट्रोल, गैस और डीजल का इस्तेमाल कम करना होगा। पड़ोस में चल रहे युद्ध के असर से दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के दाम कई गुना बढ़ गए हैं। भारत पर इस वैश्विक संकट का असर ज्यादा है, हमारे पास तेल के बड़े कुएं नहीं हैं।’
- पेट्रोल, गैस और डीजल बचाने के लिए हमें वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों की जरूरत है।
- अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें। मेट्रो में सफर और कारपूलिंग करें। ज्यादा से ज्यादा लोगों को उसमें बैठाकर ले जाएं।
- हर परिवार अगर खाने के तेल का इस्तेमाल थोड़ा कम करे तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी।
- देश को रासायनिक उर्वरकों की खपत आधी करने का लक्ष्य रखना चाहिए और तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।
- शादियों, छुट्टियों और अन्य कारणों से विदेश यात्रा कुछ समय के लिए टालना देशहित में होगा।
- सोने के आयात में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। देशहित में लोगों को एक साल तक सोना खरीदने और दान करने से बचना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल संयम के साथ करे। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर देश के लोग मिलकर ईंधन बचाएंगे, तो भारत पर वैश्विक संकट का असर काफी कम किया जा सकता है।पीएम मोदी ने कोरोना काल के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां दोबारा घर से काम करने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही उन्होंने लोगों से ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की, ताकि अनावश्यक यात्रा और ईंधन की खपत कम हो सके।
पीएम मोदी ने किसानों से अपील कि वे रासायनिक खाद 50 प्रतिशत कम करें प्राकृतिक खेती अपनाएं और डीजल पंप की जगह सौर पंप लगाएं। भारत यूरिया की अपनी जरूरत का 25 प्रतिशत, फास्फेट का 90 प्रतिशत और पोटाश का पूरा 100 प्रतिशत विदेश से मंगाता है। 2023-24 में सिर्फ उर्वरक सब्सिडी का बोझ 1.75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यूरिया बनाने के लिए प्राकृतिक गैस चाहिए जो खुद आयात होती है।पश्चिम एशिया संकट में गैस महंगी हुई तो खाद महंगी हुई और सरकार की सब्सिडी और बढ़ी। खाद कम करो तो यह पूरी चेन टूटती है।
प्रधानमंत्री की अपील का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा सोने की खरीद को लेकर रहा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में भारी मात्रा में सोना आयात किया जाता है और इस पर देश की बहुत बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उन्होंने पुराने समय की याद दिलाते हुए कहा कि युद्ध और संकट के दौर में लोग देशहित में अपना सोना तक दान कर देते थे।हालांकि उन्होंने साफ किया कि सरकार को किसी से सोना दान में नहीं चाहिए, लेकिन देशहित में लोगों को कम से कम एक साल तक सोने के नए गहने खरीदने से बचना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि चाहे शादी हो, कोई बड़ा फंक्शन हो या पारिवारिक कार्यक्रम लोगों को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे एक साल तक सोने की नई खरीदारी नहीं करेंगे।
यानी साफ है कि बढ़ते वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी अब देश को सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं, बल्कि जनभागीदारी के जरिए आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने का संदेश दे रहे हैं।
