81वां यूएनजीए सत्र:शांतिदूत से विनाश की धमकी UNGA में ट्रंप के दो रूप,आगबबूला हुए ईरान-क्यूबा….
अपने बेबाक बयानबाजी से दुनियाभर में चर्चा का विषय बने रहना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को शायद अच्छा लगता है, तभी तो जहां जाते हैं कुछ ऐसी बात बोल देते हैं, जिसको लेकर वैश्विक मंच गर्म हो जाता है।दुनिया उनके बयान को लेकर विमर्श करने में लग जाती है और ट्रंप किसी नए मंच और नई बयानबाजी के तलाश में।खैर, अब एक बार फिर ट्रंप अपने बयान को लेकर चर्चा के केंद्र में है। इस बार मंच था संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का, जहां ट्रंप ने एक तरफ खुद को आठ युद्ध खत्म करने वाला शांतिदूत’ बताया, तो दूसरी तरफ ईरान को तबाह करने और नर्क में भेजने जैसी तीखी धमकियां भी दी, जिसने सभी को हैरान कर दिया।ऐसे तनाव के समय में अमेरिकी राष्ट्रपति का यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में किस तरह की अनिश्चित और आक्रामक कूटनीति पर चल रहे हैं।मंगलवार को ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के साथ पिछले छह महीनों से चल रहे सैन्य अभियानों और दोनों देशों के बीच संभावित समझौते का जिक्र किया। इसी दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सभा से बाहर निकल गए। बाद में क्यूबा के प्रतिनिधियों ने भी ट्रंप की टिप्पणियों के बाद सदन छोड़ दिया।
ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान को लेकर सवाल उठाया कि क्या ईरान के साथ ऐसा समझौता किया जाए, जिससे वह दोबारा निर्माण कर सके और पहले से कहीं ज्यादा मजबूत देश बन सके।ट्रंप ने इसके साथ यह भी कहा कि दूसरा विकल्प इस्लामिक रिपब्लिक को तेजी से खत्म करना है, ताकि उसे दोबारा लोगों और देशों को नुकसान पहुंचाने का मौका न मिले।उन्होंने कहा, क्या मैं उन्हें बिना किसी भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद के नरक में धकेल दूं? हालांकि, ट्रंप ने साथ ही उम्मीद जताई कि चुनाव के ठीक बाद ईरान के साथ समझौता हो सकता है।ऐसे में सवाल यह है कि आखिर एक मंच से शांतिदूत और विनाश की धमकी देने वाले ट्रंप के इस बयानबाजी के मायने क्या हैं, ट्रंप आखिर क्या संदेश देन चाहते हैं?
गौर करने वाली बात यह है कि ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि पिछले साल उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति मध्यस्थता करवाई थी। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के हवाले से कहा कि ट्रंप ने 3 करोड़ से अधिक लोगों की जान बचाई है। हालांकि आपको याद दिला दें कि भारत हमेशा से इस दावे को खारिज करता रहा है। भारत का स्पष्ट कहना रहा है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) की सीधी बातचीत से हुआ था।
ट्रंप ने अपने भाषण में क्यूबा को भी निशाने पर लिया उन्होंने देश को पूरी तरह विफल राज्य बताया और कहा कि वहां जल्द आजादी आएगी। ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन क्यूबा की मौजूदा स्थिति में बुनियादी बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार इस समय पहले से कहीं ज्यादा दबाव में है।ट्रंप ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो क्यूबा के साथ बातचीत संभाल रहे हैं और बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि अब देखना होगा कि इसका नतीजा क्या निकलता है।इसके बाद क्यूबा के प्रतिनिधियों ने भी महासभा की कार्यवाही से बाहर निकलने का फैसला किया।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की हाई लेवल बैठक में शामिल नहीं होंगी। उन्होंने इसकी वजह बिजी शेड्यूल बताई है।करीब 15 साल बाद पहली बार इटली का प्रधानमंत्री UNGA की सालाना हाई लेवल बैठक में शामिल नहीं होगा। मेलोनी की जगह विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी UNGA में इटली का प्रतिनिधित्व करेंगे।मेलोनी के न्यूयॉर्क नहीं जाने से उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से आमने-सामने मुलाकात भी नहीं होगी।इस साल जून में G7 समिट में दोनों के बीच विवाद बढ़ गया था। ट्रम्प ने कहा था कि मेलोनी उनके साथ फोटो के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने जवाब दिया था, ‘ मुझे इसके लिए गिड़गिड़ाने की जरूरत नहीं हैं।’
