नहीं रहे दिग्गज शूटर जसपाल राणा,कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 गोल्ड जीते थे…
भारत के दिग्गज शूटर जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। 1 जून को जर्मनी से लौटते समय फ्लाइट में 49 साल के राणा की तबीयत बिगड़ी थी। दिल्ली पहुंचने पर उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके हार्ट में स्टेंट डाला गया था। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के प्रेसिडेंट कालीकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन की पुष्टि की।राणा के परिवार में उनकी पत्नी रीना राणा, बेटी देवांशी, बेटा युवराज, पिता नारायण सिंह राणा और उनकी बहन सुषमा सिंह और छोटा भाई सुभाष राणा शामिल हैं।नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के एक सूत्र ने कहा, हां, जसपाल को फ्लाइट में कुछ दिक्कतें हो रही थी और दिल्ली में उतरने के बाद वह सीधे अस्पताल गए। वहां, उनका टेस्ट किया गया और स्टेंट डाला गया।राणा म्यूनिख में आईएसएसएफ विश्व कप के बाद जर्मनी से लौटे थे। वह फिलहाल भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्य कर रहे थे। भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और दो स्वर्ण तक इतने ही रजत पदक जीते थे।
जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 बार गोल्ड मेडल जीते थे। इनमें लगातार 4 एडिशन के गोल्ड शामिल रहे। राणा पेरिस ओलिंपिक में डबल ओलिंपिक मेडल जीतने वाली शूटर मनु भाकर के कोच भी थे। उन्हें फरवरी 2025 में 25 मीटर पिस्टल के लिए भारतीय जूनियर टीम का हाई परफार्मेंस कोच बनाया गया था। जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स को मिलाकर कुल 23 मेडल अपने नाम किए थे। इनमें एशियन गेम्स में 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मिलाकर कुल 8 मेडल थे। कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज को मिलाकर कुल 15 मेडल जीते थे। उन्हें 18 साल की उम्र में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।जसपाल 11-12 साल की उम्र तक ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे थे। 1988 में सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित 31वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था।
एनआरएआई ने उन्हें आधिकारिक तौर पर 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। राणा को कड़ी ट्रेनिंग रूटीन शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।राणा पेरिस ओलिंपिक में डबल ओलिंपिक मेडल जीतने वाली शूटर मनु भाकर के कोच भी थे। एनआरएआई ने फरवरी 2025 में राणा को 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था।राणा का निधन भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया। उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीते और देश के सबसे सफल निशानेबाजों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई। राणा ने कई वर्षों तक शानदार ढंग से भारत का प्रतिनिधित्व किया और निशानेबाजी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई, खासकर उस समय जब देश में यह खेल विकसित हो रहा था। शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया।खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया।
