CJP ने खत्म किया आंदोलन,कहा- तीनों मांगें पूरी-प्रधान का इस्तीफा, केस वापसी और मुआवजा…
नीट पेपर लीक मामले को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर में पिछले 36 दिनों से चल रहा आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है।कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया है। साथ ही आंदोलन से जुड़े छात्रों से अपने घर लौटने की अपील की।यह घोषणा केंद्र सरकार के साथ तीसरे दौर की बातचीत के बाद हुई। इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने शनिवार को सीजेपी के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में सीजेपी के सौरव दास शामिल थे। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का तीसरा दौर सकारात्मक रहा। वार्ता के तुरंत बाद सीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर धरना समाप्त करने की घोषणा की। पार्टी ने देश भर से आए प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की है।सीजेपी प्रतिनिधि, सौरभ दास ने कहा कि हमने सरकार के साथ एक ड्राफ्ट भी साझा किया है। हमने सरकार के सामने परीक्षा में सुधार को लेकर पांच बिंदुओं का एक प्रस्ताव रखा है। जिस पर चार हफ्ते बाद फिर बैठक होगी।
इससे पहले सीजेपी प्रतिनिधियों और सरकार के बीच मांगों को लेकर 20 व 24 जुलाई को भी वार्ता हुई थी। जिसमें 20 जुलाई को जेपी नड्डा के घर पर सीजेपी प्रतिनिधियों के साथ हुई पहली मुलाकात में उन्होंने इन मांगों को रखा था।इसके बाद 24 जुलाई को सरकार और सीजेपी के बीच दूसरी बैठक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई। जिसमें सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छोड़कर उनकी दोनों मांगों पर सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति दी थी।केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी की जो मांगों थी उन्हें मान लिया गया है। इनमें जो अहम मांग थी, वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है।इसके साथ ही पांच बिंदुओं के प्रस्ताव भी दिया है, हमने परीक्षा सुधार के दौरान इस पर चिंतन करने का आश्वासन दिया है। जिसकी जानकारी बाद में उन्हें देंगे। मेरा निवेदन है कि प्रदर्शनकारी अपना आंदोलन खत्म करें।
धर्मेंद्र प्रधान ने दोपहर में एक्स पर पोस्ट करते हुए अपना इस्तीफा जारी किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।मैंने पहले दिन से ही इसकी जिम्मेदारी ली है और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा।पिछले 10 दिन का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।’जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे।मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं।’
