लद्दाख में J&K हाईकोर्ट की बेंच होगी स्थापित,अमित शाह बोले- न्याय तक पहुंच होगी आसान…
घाटी में कानूनी ज्यूरिडिक्शन के विस्तार को लेकर गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बड़ा फैसला किया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की बेंच को लद्दाख में स्थापित करने का फैसला किया है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ..
‘प्रधानमंत्री नरेंद्र जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में जम्मू कश्मीर की हाईकोर्ट की एक बेंच स्थापित करने का फैसला लिया है।’उन्होंने बताया, ‘इससे लद्दाख के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए एक न्याय तक पहुंच काफी बेहतर होगी।क्योंकि उन्हें मिलने वाली कानूनी सेवाओं के लिए लगने वाला समय कम हो जाएगा।सरकार लद्दाख के सर्वागीण विकास और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।’
हाईकोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, जम्मू कश्मीर राज्य के लिए पूरी तरह से काम करने वाला हाईकोर्ट साल 1928 में बनाया गया था। इससे पहले राज्य के शासक यानी महाराजा ही न्याय करने के मामले में आखिरी अधिकारी होते थे। 1927 में राज्य के तत्कालीन शासक ने एक नया संविधान मंजूर किया। कानूनी सदस्य की जगह न्याय विभाग में मंत्रालय स्थापित किया।इसके बाद 26 मार्च 1928 को आदेश संख्या 1 के तहत हाईकोर्ट की स्थापना हुई।महाराजा ने लाल कंवर सेन को कोर्टा पहला मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया था।1954 में संविधान आवेदन आदेश 1954 के जरिए सुप्रीम कोर्ट का अधिकार क्षेत्र जम्मू कश्मीर राज्य तक बढ़ाया गया।हाईकोर्ट को पहली बार मौलिक अधिकार लागू करने के लिए रिट जारी करने की शक्ति दी गई। 1957 में जम्मू कश्मीर संविधान अधिनियम के जरिए एक स्वतंत्र न्यायिक निकाय बना। हाईकोर्ट की मंजूर जजों की संख्या 25 है।यहां मई से अक्टूबर के अंत तक चीफ जस्टिस और हाईकोर्ट का प्रसासनिक विंग श्रीनगर में काम करता है। नवंबर से अप्रैल तक मुख्यालय जम्मू में रहता है।
