अयोध्या में दीपोत्सव:30 लाख दीयों से जगमगाई रामनगरी,हुआ श्रीराम का राज्याभिषेक….
दिवाली के मौके पर राम नगरी अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। सरयू नदी के 56 घाटों पर जलाए गए 30 लाख दीयों से रामनगरी जगमगा उठी। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की शुरुआत की। सुबह साकेत महाविद्यालय से निकली श्रीराम राज्याभिषेक शोभायात्रा से शुरू हुआ उत्सव देर शाम तक 30 लाख दीपों की रोशनी, सरयू की महाआरती, ड्रोन शो और आतिशबाजी के बीच अपने चरम पर पहुंचा। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।दीपोत्सव का शुभारंभ सुबह 10 बजे साकेत महाविद्यालय से श्रीराम राज्याभिषेक शोभायात्रा के साथ हुआ। करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय कर शोभायात्रा रामकथा पार्क पहुंची। इसमें प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को दर्शाती 14 झांकियों के साथ रामायण के सातों कांडों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। 14 राज्यों के 500 से अधिक कलाकारों ने अपनी-अपनी लोकसंस्कृतियों और परंपराओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का आगमन हुआ और रामकथा पार्क में श्रीराम के राज्याभिषेक की प्रक्रिया शुरू हुई। रामचरितमानस की चौपाई ”प्रथम तिलक वशिष्ठ मुनि कीन्हा, पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा। सुत बिलोकि हरषीं महतारी, बार बार आरती उतारी…”, मानो मंच पर साकार हो उठी। सबसे पहले उपराष्ट्रपति ने प्रभु श्रीराम का राजतिलक किया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने तिलक कर आरती उतारी। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगियों और रामनगरी के प्रमुख संतों ने भी बारी-बारी से राम दरबार की आरती की।अयोध्या दीपोत्सव 2026 के अवसर पर राम कथा पार्क में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों का सम्मान किया। उन्होंने संतों को मिष्ठान, दक्षिणा और उपहार भेंट किए। इस अवसर पर संतों ने अयोध्या के विकास, धर्म-संस्कृति के संरक्षण और दीपोत्सव को नया स्वरूप देने के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की।देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन अयोध्या में दीपोत्सव में शामिल हुए।इस दौरान उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि आज मैं भगवान राम की जन्मस्थली, अयोध्या जैसी पवित्र नगरी में इस शुभ अवसर पर उपस्थित हूं। वे हमारे लिए केवल भगवान ही नहीं, बल्कि धर्म, सदाचार, करुणा और आदर्श आचरण के शाश्वत प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची महानता सत्ता या पद में नहीं, बल्कि चरित्र की मजबूती और अपने कर्तव्य का पालन करने के संकल्प में निहित है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी और प्रधानमंत्री मोदी, दोनों ही भगवान राम के दिखाए मार्ग पर चल रहे हैं।
अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या का राजकुमार अयोध्या वापस आया, उस समय भी अयोध्या के लोगों ने अयोध्या को जीवंत होते हुए देखा था। आज की अयोध्या त्रेतायुग का स्मरण कराती है।मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा, “अयोध्यापुरी के बारे में, सरयू के बारे में, हमने रामायण के माध्यम से सुना होगा, आज वह दृश्य जीवंत रूप से देखने को मिल रही है। ये ताकत ऐसे ही नहीं हुई, श्रीराम की चेतना ही भारत की चेतना है, ये भारत की संस्कृति है, संस्कार हैं, श्रीराम भारत के प्राण हैं, और श्रीराम भारत के आत्मसम्मान है।अयोध्या के कण कण में राम विराजमान हैं।”उन्होंने आगे कहा, “हो सकता है कि चुनौतियां आई होंगी, उन चुनौतियों का सामना करने के लिए राम भक्तों ने, नागाओं ने, निहंगों ने उसका सामना भी किया। हमने 500 वर्षों के गुलामी के कालखंड में, विदेशी आक्रांताओं के कालखंड में लगता था कि फिर वे विराजमान हो पाएंगे या नहीं। आज अयोध्या फिर से उस गौरव को प्राप्त करने के लिए, जिसके लिए कारसेवकों ने अपना बलिदान दिया।”
