अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता, जंग खत्म,दोनों प्रेसिडेंट ने दस्तखत किए…
अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच जारी युद्ध पर फिलहाल रोक लग जाएगी। खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होगा। दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल गया है।इस डील से ईरान को तुरंत बड़ा फायदा होगा। वह दुनिया में फिर से अपना तेल बेच सकेगा।18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच जो 14-सूत्री समझौता हुआ, जिसमें सबसे अहम शर्त थी- ‘ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं खरीदेगा, न विकसित करेगा और न ही बनाएगा।’ ट्रंप ने इसे समझौते की ‘99.9%’ सबसे बड़ी कामयाबी बताया।ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के मसौदे को राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षरों के साथ अंतिम रूप दे दिया गया है। अब समझौते के कार्यान्वयन का परीक्षण करने का समय है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैकों के साथ डिनर के दौरान इस पर दस्तखत किए। तेहरान में ईरान के राष्ट्रपतिमसूद पेजेशकियान ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देश अब 60 दिनों तक नए सिरे से बातचीत करेंगे। वहीं, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप साल 2015 के परमाणु समझौते से बेहतर डील करा पाएंगे? इस पुरानी डील को उन्होंने आठ साल पहले खुद रद्द कर दिया था।यह समझौता मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दोनों पक्ष अब इस समझौते के व्यावहारिक कार्यान्वयन पर नजर रख रहे हैं।
अमेरिका ने युद्ध की शुरुआत में कहा था कि वह ईरान के मिसाइल भंडार को पूरी तरह खत्म कर देगा। वह हिजबुल्ला, हुथी और इराकी मिलिशिया जैसे उग्रवादी गुटों को मिलने वाली ईरानी मदद को रोकना चाहता था। अमेरिकी और इस्राइली हमलों में ईरान के मिसाइल ठिकानों को भारी नुकसान तो हुआ है, लेकिन वह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। ईरान ने पिछले हफ्ते भी इस्राइल पर मिसाइलें दागी थीं। उग्रवादी गुटों पर ईरान का प्रभाव पहले जैसा ही मजबूत है। समझौते के मसौदे में ईरान की मिसाइलों और इन गुटों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है।
समझौते की प्रमुख बातें..
- समझौते पर हस्ताक्षर के साथ अमेरिका, ईरान और इनके सहयोगी सभी मोर्चे पर सैन्य अभियान बंद करेंगे।
- अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।
- दोनों पक्ष 60 दिन की लंबी वार्ता के दौरान अंतिम समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे, यह समय बढ़ाया जा सकता है।
- ईरान ने यह बात दोहराई है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और न ही उसका विकास करेगा।
- अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगाए गए यूएन समेत सभी प्रतिबंधों को हटाने का वादा किया है।
