आधार, वोटर ID और अब पासपोर्ट भी नहीं नागरिकता का प्रमाण,फिर भारतीयता का सबूत क्या…
विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, ये सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है। 14वीं पासपोर्ट सेवा दिवस सरकार ने कहा कि पासपोर्ट केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा के लिए जारी किया जाता है।इससे पहले SIR से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं।तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का सबूत है।
क्या है विदेश मंत्रालय का पूरा बयान?
- विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
- विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
- मंत्रालय ने अपने बयान में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का हवाला दिया। इस प्रावधान के तहत केंद्र सरकार अगर जरूरी समझे तो सार्वजनिक हित में किसी गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है। इसी कानूनी स्थिति के कारण एक पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का पूर्ण या अचूक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
- विदेश मंत्रालय ने कहा कि कानूनी रूप से भारतीय नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है, जबकि पासपोर्ट शुरुआत से ही पासपोर्ट अधिनियम के तहत आते हैं।
समझिए क्या कहता है भारत का कानून?
सबसे पहले आपको इस सच्चाई से अवगत करा दें कि भारतीय कानून (नागरिकता अधिनियम, 1955) में ऐसा कोई एक इकलौता डिजिटल कार्ड या सरकारी कागज नहीं है, जिसे दिखाते ही हर व्यक्ति की नागरिकता तुरंत सिद्ध हो जाए। भारत में नागरिकता किसी एक पहचान पत्र से नहीं, बल्कि आपके जन्म के समय, स्थान और माता-पिता के कानूनी दस्तावेजों की पूरी कड़ी को मिलाकर साबित होती है।
अदालतों और सरकार के मुताबिक, जहां आधार कार्ड सिर्फ आपकी पहचान और पते का जरिया है, वहीं वोटर आईडी और पासपोर्ट बहुत मजबूत सहयोगी दस्तावेज तो हैं, लेकिन कानूनी तौर पर इन्हें भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता। इसके अलावा आपका जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल के पुराने रिकॉर्ड्स ही इस कानूनी पहेली की सबसे मजबूत बुनियाद बनते हैं।
कोई एक दस्तावेज आपकी नागरिकता साबित नहीं कर सकता है। ऐसे में इस मामले की गंभीरता और स्थिति को देखते हुए सरकारी अधिकारी कुछ दस्तावेजों की की जांच कर सकते हैं। वे कौन-कौन से कागजात हैं, आइए आपको बताते हैं।
- जन्म प्रमाण पत्र
- स्कूल छोड़ने का सर्टिफिकेट (टीसी) या शैक्षणिक दस्तावेज
- पासपोर्ट
- वोटर आईडी कार्ड
- आधार कार्ड
- ड्राइविंग लाइसेंस
- सरकारी जमीन या संपत्ति के रिकॉर्ड
- इंश्योरेंस (बीमा) के दस्तावेज
इसके अलावा कोई भी ऐसा सरकारी कागज जिसमें आपका जन्म स्थान और तारीख दर्ज हो। इसके अलावा आपको ध्यान इस बात पर भी देना है कि इनमें से कोई भी एक दस्तावेज अकेले नागरिकता साबित करने के लिए काफी नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि इस जांच से संबंधित अधिकारी स्थिति के हिसाब से इन सभी कागजातों को मिलाकर देखते हैं।
दस्तावेजों की पूरी चेन साबित करेगा आपकी नागरिकता
इस बात को ऐसे समझिए कि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की नागरिकता किसी एक सर्टिफिकेट से नहीं, बल्कि दस्तावेजों की एक पूरी चेन से साबित होती है। जब भी नागरिकता पर कोई सवाल उठता है, तो नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत आपके जन्म के रिकॉर्ड, माता-पिता की डिटेल्स और अन्य सरकारी कागजातों को एक साथ रखकर जांचा जाता है। यही वजह है कि अपने बुनियादी दस्तावेज, जैसे जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल के सर्टिफिकेट को संभालकर रखना बेहद जरूरी है।
