चारधाम यात्रा से दो दिन पहले शुरू हुआ ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन:आरती उतार और माला पहना दर्ज हुआ नाम…
चारधाम यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि हिमालय की कठिन और दिव्य यात्रा का अनुभव है ।हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा पर निकलते हैं, और 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
हरिद्वार स्थित ऋषिकुल मैदान में आज शुक्रवार से चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। सुबह 6 बजे से ही रजिस्ट्रेशन काउंटर खोल दिए गए थे। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा समेत देश के दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। रजिस्ट्रेशन शुरू होते ही बड़ी संख्या में यात्रियों ने ऋषिकुल मैदान पहुंचकर अपना पंजीकरण कराया। मध्य प्रदेश से आए एक यात्री ने बताया कि हरिद्वार प्रशासन द्वारा बहुत अच्छी व्यवस्थाएं की गई हैं।उनका स्वागत माला पहनाकर किया गया और उन्हें प्रसाद भी दिया गया। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन और धामी सरकार का आभार व्यक्त किया ।
उत्तराखंड सरकार ने इस बार ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए कई शहरों में काउंटर बनाए हैं।हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून में रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है।हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान और ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप व ISBT पर बड़ी संख्या में काउंटर लगाए गए हैं, जहां जाकर श्रद्धालु अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके अलावा यात्रा रूट पर भी कई जगहों पर ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन सेंटर बनाए गए हैं, जैसे जानकीचट्टी, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, जोशीमठ और गोविंद घाट ।इन जगहों पर रजिस्ट्रेशन करवाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा करने पर परेशानी हो सकती है ।
रजिस्ट्रेशन के लिए आपको इन डॉक्यूमेंट की जरूरत होगी।आधार कार्ड/पहचान पत्र/पैन कार्ड/ड्राइविंग लाइसेंस इशके साथ एक अपना मोबाइल नंबर और फैमली मेंबर में से किसी एक का मोबाइल नम्बर, इसके अलावा चारधाम दर्शन का डेट बताना होगा।
सरकार ने इस बार हेल्थ प्रोटोकॉल भी सख्त किए हैं। खासकर 55 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और पहले से बीमारियों से जूझ रहे श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल चेकअप अनिवार्य किया गया है। कई हेल्थ सेंटर और मेडिकल रिलीफ पोस्ट भी बनाए गए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा रात 10 बजे के बाद यात्रा रूट पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है ।यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में रात के समय खतरा ज्यादा रहता है।
