नेपाल में बाढ़ से तबाही,95 की मौत, 500 से ज्यादा लापता,यूपी-बिहार में अलर्ट…
नेपाल में भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 95 हो गई है।सुबह 9 बजे तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया जिसमें कई इलाके चपेट में आ गए। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन ,धादिंग , नुवाकोट , गोरखा और रसुवा में शव बरामद किया गया है। बाढ़ से प्रभावित इलाकों में अब भी तलाशी और बचाव अभियान जारी है।नेपाल दूतावास ने बताया कि बाढ़ से घरों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां, आपदा प्रबंधन विभाग, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं को राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है। प्रभावित इलाकों में तलाशी और बचाव अभियान, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा आपात चिकित्सा सहायता देने का काम जारी है।नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्य के लिए 14 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। हालांकि, टिमुरे में स्थानीय हेलीपैड के बह जाने के कारण राहत टीमों को उतरने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।आपातकालीन सहायता के लिए नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने हेल्पलाइन नंबर (1234, 1144, और 9851289445) जारी किए हैं।काठमांडू में भारतीय दूतावास ने आज नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए इमरजेंसी नंबर जारी किए हैं(+977 985 131 6807, +977 970 910 7500)।
नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 105 भारतीय समेत 291 विदेशी पर्यटक हैं। इधर, यूपी के बहराइच में नेपाल की ओर से तेज बहाव में बहकर 5 जंगली हाथी घाघरा बैराज पहुंच गए। झुंड में 3 बच्चे भी हैं।नेपाली अधिकारियों के मुताबिक एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि जिस ग्लेशियल झील के फटने से अचानक बाढ़ आई थी, वहां अभी भी करीब 7 मीटर ऊंचा पानी का बांध बना हुआ है। यह कभी भी टूट सकता है।बाढ़ का असर रसुवा से नुवाकोट, धादिंग होते हुए चितवन तक देखा गया। रसुवा में टिमुरे, स्याफ्रुबेसी, हाकुबेसी, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी बस्ती और बेत्रावती समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुईं। बाढ़ धादिंग के गल्छी तक पहुंची और आगे मुग्लिन की ओर बढ़ने की चेतावनी दी गई।बेत्रावती से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक करीब 42 किमी सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई। इसके अलावा स्याफ्रुबेसी से सीमा तक 16 किमी सड़क को भी नुकसान पहुंचा।अचानक आए पानी के सैलाब ने कई गांवों, सड़कों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को तबाह कर दिया है।
नेपाल के स्थानीय प्रशासन के अनुसार, रसुवा क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के दौरान मात्र 7 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसलिए इस भीषण बाढ़ का कारण स्थानीय बारिश नहीं, बल्कि तिब्बत के ऊपरी हिस्से में स्थित किसी ग्लेशियल झील का फटना माना जा रहा है।शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक, ल्हेंदे नदी में बर्फ और पत्थरों का बड़ा हिस्सा गिरा, जिससे नदी का रास्ता रुक गया और पानी जमा होने लगा।बाद में यह रुकावट टूट गई और जमा पानी तेज रफ्तार से नीचे बहा, जिससे अचानक फ्लैश फ्लड आ गई। ग्लेशियल झील फटने (GLOF) की संभावना की भी जांच की जा रही है। उस समय रसुवा में तेज बारिश नहीं हुई थी।हालांकि इसकी वजह भूकंप भी बताई जा रही है। सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। बाढ़ भी इसी समय के आसपास आई, इसलिए इसके संबंध की जांच हो रही है।
भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची बाढ़ की लहर आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है।सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। अगले 5-6 घंटे अहम बताए गए हैं।वहीं बिहार में बाढ़ के खतरे को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फोन पर बातचीत की। गृह मंत्री ने संभावित संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए NDRF को संगठित किया जा रहा है।बिहार के जल संसाधन विभाग ने गंडक बैराज के सभी फाटकों को खोलने और नहरों में पानी प्रवाहित करने का निर्देश दिया है।गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और बेतिया में NDRF और SDRF की टीमों को तैनात और स्टैंडबाय पर रखा गया है।नेपाल में आए उफान का असर उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में भी देखा जा रहा है। महराजगंज, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर और कुशीनगर में रोहिन, गंडक और अन्य सहायक नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।यूपी प्रशासन ने नेपाल सीमा से सटे सभी निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है और ग्रामीणों को नदियों के पास न जाने की सलाह दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने बाढ़ के कारण हुई मौतों पर शोक जताया और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल को हर संभव मानवीय और राहत सहायता देने का भरोसा दिया। नेपाल में बाढ़ के कारण कई इलाकों में हालात गंभीर बने हुए हैं। भारत ने संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ खड़े रहने और जरूरत के मुताबिक राहत एवं मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।अधिकारियों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के विमानों से दवाइयों और राशन समेत जरूरी राहत सामग्री नेपाल भेजी जा रही है। यह सहायता सरकार की मानवीय सहायता और आपदा राहत पहल के तहत दी जा रही है। भारत नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के बचावकर्मियों को भी भेजने की तैयारी कर रहा है।
