पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान के साथ मुलाकात,तस्वीर में नजर आई गर्मजोशी…
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। करीब दो सप्ताह के भीतर दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ एक तस्वीर चर्चा में रही। तस्वीर में पीएम मोदी ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामे नजर आए। उनके साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी दिखाई दिए।यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब दुनिया बड़े भू-राजनीतिक उलटफेरों के दौर से गुजर रही है। ईरान उस संघर्ष के केंद्र में है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। वहीं, यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर पश्चिमी देशों ने व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद पेजेश्कियन की पहली भारत यात्रा है।भारत ने दोनों देशों के साथ अपने संपर्क बनाए रखे हैं। साथ ही अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी भी जारी रखी है। ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठक में भी भारत का यही रुख दिखाई दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष खत्म करने की अपील की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की बैठक पश्चिम एशिया के तनाव, रणनीतिक कनेक्टिविटी और एनर्जी सिक्योरिटी के लिहाज से बेहद अहम है। ये बैठक ऐसे वक्त हो रही है, जब मिडिल ईस्ट इजरायली और अमेरिका से संघर्ष के बीच जूझ रहा है। ईरान ने भारत से कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर बातचीत के रास्ते खोलने की उमीद जताई है।स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नाकेबंदी के चलते भी प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा दोनों देश डॉलर पर निर्भरता कम कर आर्थिक सहयोग मजबूत करने पर भी जोर दे रहे हैं। भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह, और क्षेत्रीय व्यापार से जुड़े रणनीतिक मुद्दे पर निरंतर सहयोग की आवश्यकता है।
इससे पहले BRICS बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल की वकालत की। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि आज दुनिया अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और पॉलिटिक्ल प्रेशर बनाने के लिए आर्थिक साधनों का बढ़ता इस्तेमाल, इन सब ने उस आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है। सवाल यह है कि इन चुनौतियों पर ब्रिक्स का क्या जवाब है? हमारा मानना है कि ब्रिक्स की असली ताकत सिर्फ उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था के आकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तब और साफ तौर पर दिखती है, जब इन क्षमताओं को व्यापार, निवेश और जॉइ्ंट फाइनेंसिंग के नेटवर्क में बदला जाता है। यानी संभावित सहयोग से असल कामकाज वाले सहयोग की ओर बढ़ना है।
