हिमंत बिस्व सरमा फिर बने असम के सीएम,2 बीजेपी और 2 सहयोगी दलों से मंत्री बने…
गुवाहाटी में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।असम के गवर्नर लक्ष्मण आचार्य ने गुवाहाटी के खानापारा वेटरनरी कॉलेज ग्राउंड में उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई।हिमंता के अलावा 4 विधायकों भाजपा के रामेश्वर तेली, अजंता नेओम, AGP के अतुल बोरा, BPF के चरण बोरो ने मंत्री पद की शपथ ली है। इनमें दो बीजेपी और 2 सहयोगी दलों से हैं। शपथ कार्यक्रम में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत बीजेपी-NDA शासित राज्यों के सीएम और कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे। हिमंता का पूरा परिवार भी कार्यक्रम में मौजूद रहा।
हिमंत बिस्व सरमा के राजनीतिक करियर पर नजर डालें तो सामने आता है कि ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के बाद वे कांग्रेस में दो मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले गए। हालांकि, 2015 में भाजपा में शामिल होने के बाद वे असम में पार्टी का प्रमुख चेहरा बने और यहीं से उनके 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ। 10 मई 2021 को वे असम के 15वें मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब भाजपा ने किसी अन्य पार्टी से आए नेता को मुख्यमंत्री का पद सौंपा था।
कांग्रेस पृष्ठभूमि से होने के बावजूद, सरमा ने भाजपा में कट्टर हिंदुत्व की राजनीति को पूरी तरह से अपनाया है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने इस ओर कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने गोहत्या विरोधी कानून (मवेशी संरक्षण अधिनियम) पारित किया, राज्य की तरफ से वित्त पोषित मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदला और बंगाली मूल के मुसलमानों, जिन्हें ‘मियां’ कहा जाता है के खिलाफ बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाए।इस आक्रामक छवि के समानांतर, उन्होंने स्थानीय जनता के बीच अपनी एक बहुत ही सुलभ छवि गढ़ी है। असम के युवा और महिलाएं उन्हें प्यार से मामा या दादा (बड़े भाई) कहते हैं, जो जनता के बीच जाकर उनके साथ नाचने-गाने और उन्हें सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
