क्या पाकिस्तान के सामने मंडरा रहा भूखमरी का संकट ?
लालकिला पोस्ट डेस्क
कंगाल पाकिस्तान के लोगों की जिदंगी इन दिनों मुश्किलों से भरी है। एक ओर जहां पाक के पीएम दुनिया के तामाम देशों के आगे कटोरा लेकर भीख मांग रहे हैं, कंगाली के कगार पर खड़े पाकिस्तान में लोग महंगाई की आग में झुलस रहे हैं। देश की आर्थिक स्थिति बदतर होने से बेरोजगारी भी तेजी से बढ़ने लगी है। उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के नए फैसले से आम लोगों के लिए एक समय की रोटी के भी लाले पड़ने वाले है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में गेहूं और आटे के दाम आसमान छू रहे हैं। हालात और खराब न हों, इसके लिए इमरान सरकार ने गेहूं और आटे के एक्सपोर्ट पर तत्काल बैन लगाने का फैसला किया है। पाक मीडिया के मुताबिक इस बार गेहूं का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 33 फीसदी कम हुआ है। इसके अलावा पाकिस्तान में जमाखोरी बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इसीलिए 10-12 रुपये में बिकने वाली गेहूं की रोटी की कीमत अब 20 से 30 रुपये तक पहुंच गई है।
रोटी और गेंहू से बने उत्पादों को नियंत्रित करने के लिए इमरान सरकार उसके एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध का फैसला किया है। इकनॉमिक को-ऑर्डिनेशन कमिटी की हुई बैठक में ये फैसले हुआ है। आपको बता दें कि पाकिस्तान में सरकार आर्थिक तौर पर कंगाल हो चुकी है। अर्थव्यवस्था चलाने के लिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कड़ी शर्तों पर कर्ज लेना पड़ रहा है। जिसे देखते हुए सरकार को नए-नए टैक्स लगाने पड़ रहे हैं।
पाकिस्तान की हालत का अंदाजा पिछले साल दिसंबर में डॉन अखबार में प्रकाशित एक सर्वे से लगाया जा सकता है, जिसके मुताबिक 9 फीसदी लोगों ने कहा कि वे आत्महत्या की कोशिश कर चुके हैं। बताया गया है कि इसके पीछे सामाजिक कारण जिम्मेदार हैं। डॉन के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2012 में यहां आत्महत्या की दर प्रति एक लाख लोगों पर 13 हजार थी। इतना ही नहीं पूरे पाकिस्तान में 34 फीसदी लोगों को डिप्रेशन की समस्या है।
